Maulana Sanaullah fumbles on the question raised by rishi Dayanand !

Vishal Arya with नटराज मुमुक्षु and 8 others

July 31 at 12:43pm · Edited · .

मौलाना सनाउल्लाह ने ऋषि दयानंद जी के तर्कों व युक्तियो को पढ़कर ऐसे हडबडा गए की सारी इनकी सुध बुध ही ख़त्म होकर बिखर गयी | एक छोटा सा उधारण आप खुद देख ले –

जब ऋषि दयानंद जी ने बहिश्त (स्वर्ग) में खटमल आदि के काटने व खाने पीने से मल – मुत्रादी के विसर्जन से रोग व गन्दगी का प्रश्न उठाया तो मौलाना ने इस १४१ वी समीक्षा का उत्तर देते हुए लिखा है , “” हा निसंदेह होंगे , परन्तु काफ़िरो से ही यदि यह कार्य खुदा ले तो कोई हरज की बात ही नहीं | उन्ही को इस बेगार (bonded labour) में फसायें | ”” (हक प्रकाश पृष्ठ २१६)

इस अवतरण से स्पष्ट है की मौलाना अपनी जन्नत को प्रदुषण से गन्दगी से बचाने के लिए काफ़िरो को बहिश्त में प्रवेश देने के लिए अल्लाह मिया को विवश मानते है , परन्तु इसके तुरंत बाद इन्होने दस पृष्ठ के पश्चात यह लिख मारा , “” खुदा ने काफिरों व मुशरिको पर जन्नत को हराम किया है | “” (हक़ प्रकाश पृष्ठ २२७)

अब आप खुद समझ सकते है की इनकी सत्यार्थ प्रकाश पर समीक्षा(?) किस स्तर की थी |

with Kalki Sharma

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O Convert, Welcome to the Vedic Dharma

Rajvir Arya ne mushafiq hussain se islam par kuch prashn pooche

arya rajveer ji, jinhone ek kitaab ‘kalamullah ved ya quran’ likhi hai mushafiq se dilli pustak mela mein mile.   [https://archive.org/details/KitabullahvedYaQuran]

usi mele mein vivek arya ji ne mushafiq ke saath photo bhi khinchwai.

photo: mushafiq hussain of islam hinduism initiative ; dr vivek arya of  delhi  arya sabha at Delhi Book Fair, 2014.

Arya Rajveerji ne mushafiq hussain se Islam par Delhi book fair [23 feb] 2014 mein ye prashn kiye:

1. allah akbar, raheem, rehman, kadir  ityadi  hai? kya tab se hai jab se duniya bani hai ya pehle se hai? yadi pehle se hai to tab kis par raheem, rehman, kadir ya akbar tha?

2. is janm ka parinaam jannat ya jahannum hai. yeh jeevan jo tum abhi jee rahe ho;  kiska parinaam hai?

mushafiq ka jawab: main aapko email se jawab bhej dunga.

chunki email abhi tak nahin aaya hai , isliye pathakon se anurodh hai ki mushafiq ko tab tak in prashmon ki yaad dilate rahen jab tak jawab nahin mil jaate.

namaste.

क्या कुरान के अल्लाह को किसी की मदद लेनी पड़ती है ?

क्या कुरान के अल्लाह को किसी को मदत लेना पड़ता है।मित्र इश्वर सर्व शक्तिमान है, इस लिए इश्वर को कोई प्रकार सहायता कि प्रोयोजन नेही होता, इश्वर अपने समर्थ से अपनी सबि कार्य खुद ही कर लेता है। जैसा सृष्टी, पलय, और जीबआत्मा के कर्म फल प्रदान करने मे इश्वर को किसी के सहायता कि कोई प्रोयोजन नेही होता है।परन्तु कुरान के अल्लाह किसी के सहायता बिना खुद अपनी कार्य करने सख्सम नेही है। इस लिए कुरान के अल्लाह को सर्वदा फरिश्तो के सहायता लेना पड़ा।अल्लाह के लिए सबी फ़रिश्ते किस प्रकार मदतगार थे, इसका प्रमाण कुरान में अनेक जागा में मिलते है। उसमे से एक प्रमाण आप लोगो के सामने पेश कर राहा हूँ। और जरुरत पड़ने से आगे और दे दूंगा।
मित्र मुसलमान मित्र जन का कहना है अल्लाह सब का मदतगार है, पर खुद अल्लाह किसी का मदत नेही लेता है। मुसलमान के ऐसी बात के लिए आप लोग जब किसी मुसलमान मित्र से पूछ लेंगे, जब अल्लाह किसी के कोई मदत नेही लेता तो कुरान को कैसे उतारा गया था, ओ ही कुरान जिसे आप लोग कलामुल्लाह मानते है। सच कहता हूँ मित्र आप लोगो के पूछ ने से ही मुसलमान मित्र जनो का बोलती बंद हो जायगा जी। अब देखते है कुरान आया तो आया कैसे।
अल्लाह ने जिब्राइल को कुरान सुनाया और जिब्राइल गारे-हिरा नाम का एक गुफा में आकर पहले हजरत मोहम्मद का सीना चाक किया, यानि मोहम्मद साहब का दिल को निकाला, फेर उसे आवे जमजम से धोया और बाद में उसे मोहम्मद साहब के शारीर में राख कर सिल दिया।जिब्राइल पहले कुरान के पांच आयेते लेके आया था, जिसका प्रमाण मैंने फोटो में दे राखा है। जिसका अर्थ है।
1. पड़ो अपने रब के नाम के साथ जिसने पैदा किया।
2. जमे हुए खून के एक लोथरे से इंसान कि रचना की।
3. पड़ो, और तुम्हारा रब बड़ा उदार है।
4.जिसने कलम के द्वारा ज्ञान कि शिख्सा दी।
5.इन्सानको वह ज्ञान दिया जिसे वह ना जानता था।
———————————–
अब जिब्राइल के इस कारनामा से कुछ सवाल सामने आ गाया है।
1.जब जिब्राइल को मुहम्मद साहब को पड़ाने के लिए ये सब करना पड़ा था, क्या किसी को पड़ाने के लिए उसका सीना चीर के दिल को निकाल के, जमजम के पानी में धोके, फेर उसे शारीर में राख के सिल देने से ही उसे पड़ाना कहता है ?
2.जब अल्लाह ने जिब्राइल को बिना किसी चीर फार के पड़ा सकते है तो मुहम्मद साहब को पड़ाने में अल्लाह को क्या पड़ेशानी हुआ था ?
3.जब मुहम्मद साहब को जिब्राइल ने चीर फार करके पड़ा दिया, तो कुरान किसका कालाम हुआ, जिब्राइल का या अल्लाह का ?
4.किसी के दिल निकाल के फेर उसकी शरीर में दिल लागाने समय ओ आदमी बेहोश हो जाता है, जिब्राइल उस समय पड़ाया था या बाद में पड़ाया था ?
5.क्या एक गुफा के अन्दर इस तरह से सुपर सर्जरी किया जा सकता है।
6.जिब्राइल ने मुहम्मद साहब को पड़ाने के लिए जो सुपर सर्जरी किया था, उस सर्जरी में कौन कौन सा यंत्र का इस्तेमाल किया गया था?
7.जिब्राइल को ऐसी सुपर सर्जरी करना कौन सिखाया था, क्या अल्लाह ने जिब्राइल को सिखाया था ?
8.अल्लाह जिब्राइल जैसे और कुछ फ़रिश्ते को धरती पे भेज देता तो आज कम से कम मुसलमानो को किसी भी सर्जरी में लाखो रूपया गावाना नेही पड़ते।फेसबुक के मित्र जनो मैं तो सिर्फ इस्लाम के थोड़ा सा सच्चाई आप के सामने राख राहा हूँ, इस्लाम में ऐसी अनेक सच्चाई भड़ा पड़ा है।
हायरे बुधि से विचार करने वाले मानव और कब तक तुम लोग ऐसी मुर्ख बनके रहोगे ?

— with Jay AryaAarya SandeepShiva Ji Bharat and 46 others.

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comments
Mahender Pal Arya यह धारणा ही गलत है की अल्लाह किसी का सहयोग नही लेता ? अगर सहयोग न ले तो दुनिया बनाना अल्लाह की बस की बात नहीं ? सबसे पहले अल्लाह ने कुन कहा होजा ? जब कोई वस्तु अभी बनायाही नहीं गया तो किस को कहा -होजा एक आदेश है होने का कारण क्या है ? कौन कौन जी वस्तुवों के द्वारा होना है,यह इस्लाम नहींजानता और न अल्लह ही इसका जवाब देसकता ? फिर आदम को बनाने के लिए मिट्टी मंगवानी पड़ी अब जो मिट्टी लाया अल्लाह उसके अधीन होगया ?वह मुर्ख है जो कहता है की अल्लाह किसीका मोहताज नहीं ? अल्लाह हर मुस्लमान के दोनों कन्धों पर दो फ़रिश्ते बिठाया नेकी -और बदी को लिखवाता है ? अल्लाह उस किराबीन और कातेबीन के अधीन है ? हर मुस्लमान के रूह [आत्मा] निकालने के लिए, मालेकुल मौत [मौतकी मलिक] जिब्रील , दुनिया को फ़ना करने के लिए इस्राफील सुर फुंकेगे , फिर कबर में सवाल करने को ,मुनकिर ,और नकीर , दो फ़रिश्ते आएंगे अदि ,इसप्रकार अनेक फ़रिश्ते है अल्लाह जिन से कम लेते हैं -उनके बिना अल्लाह का काम चलही नहीं सकता | यह अज्ञानता है जो यह कहते की अल्लाह किसी का मोहताज नहीं

  • Golam Mustarshid Alquadry Vedic iswar ko sristi k liye prakriti k mohtaj hona parta hai prakri isi karan unke nikat anadi hai,
    aur faristo se madad lena iska arth ye hai k badsaj apne noukar ko kaam karne ka adesh de raha hai raja chote se chota kaam v noukar se karwata hai to kya wo us chote kaam me noukar ka mohtaj hoga
  • Shiva Ji Bharat Jab ye prakriti (space) he ni tha to Kuran ka allaa aur uske farishte rahate kaha the…..musalman bolegaa jannat me to jannat kaha stheet tha bhai jab koi space he ni tha to….musalman bhai thodi roshni daloge kyaa ispar
    सुशील आर्यवीर मुश्तरशिद
    ईश्वर प्रकृति का मोहताज नहीँ वो कैसे अभी बताता हूँ पहले आप बतायेँ क्या कुरान का ज्ञान मुहम्मद को देने के लिए खुदा जिब्रील का मोहताज था या नहीँ अगर नही था तो सीधा कुरआन मुहम्मद पर क्योँ न आया
    दूसरी बात कुरआन का अल्लाह खुद घोषणा कर रहा है कि वो मोहताजी है कैसे देखो कुरआन शरीफ सूरा मुहम्मद आयत 7
    तर्जुमा
    हे वे लोग जो ईमान लाये हो यदि तुम अल्लाह की मदद करोगे तो वह तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हारे कदमोँ को जमा देगा
    Vaibhav Kaushik Yeh raha Sushilji.. Surah Muhammad Ayat 7
    1450856_258269647657213_1235721829_n
    My comments
    [Observe: Allah, his messenger and their contract with the muslims]
    O you who believe! If you help God, that is to say, His religion and His Messenger, He will help you, against your enemy, and make your foothold firm, He will make you stand firm [while you fight] on the battleground.

अल्लाह ने …….. फूंका और मरियम को बच्चा पैदा हुआ

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इस्लाम अल्लाह अल्लाह करके गला फाड़ने वाला Abdullah Is Back जी ने फेसबुक में अपनी पोस्ट डाल के फेर से फंसा दिया इस्लाम को।

मित्र काल रात पंडित Mahender Pal Arya जी और मेरा नाम लेके एक पोस्ट फेसबुक में अब्दुल्लाह जी के दुयारा डाला गया। इस में अब्दुल्लाह जी ने दावा किया पंडित जी और हमलोग कुरान के आयेते के गलत अर्थ करके कुरान के ऊपर अपशब्द का प्रोयोग किया। जब मैं अब्दुल्लाह जी के ये पोस्ट देखा, इसका जवाब देना उचीत समझा, ताकि फेसबुक के सबी मित्र जनो को सत्य ज्ञान हो जाय। अब्दुल्लाह जी इस्लाम के बचाव के लिए किस प्रकार झूट बोलते है उसका जीता जागता प्रमाण आप लोगो को मेरे इस पोस्ट पर ही मिल जायगा। आप लोग ध्यान पूर्वक पड़े।
मित्र कुछ दिन पहले सुशील आर्यवीर जी के ” खतना ” पोस्ट पर मैंने कुछ commente किया था. मेरा उस commente के सवाल जवाब के आगे अब्दुल्लाह जी से कुरान के ” सूरा 21अम्बिया आयेत 91″ के ऊपर debete हुआ था। इस आएते का अर्थ है- अल्लाह ने मरियम के शर्मगाह में फूंक मारके मरियम और उसके बेटे को दुनिया भर के लिए निशानी बाना दिया है। इस बिषय पे लगातार तीन दिन अब्दुल्लाह जी से हम लोगो का debete हुआ था, और आखरी में जब सबी प्रमाण के साथ हम ने उनको दिखा दिया, कि खुद उनके ही इस्लाम के जानकार अब्दुल करीम पारीख जी ने भी अपनी आसान कुरानिक कोष में भी आयेते में आया फर्जहा शब्द का अर्थ शर्मगाह ही किया तब जाके इनका बाहेस ख़तम हुआ था। निचे कुरान के उसी आयेते का लिख रहा हु।देखिये-
वल्लती अह्सनत फर्जहा फ़ना फखना फिहा मिरुहेना वजायलनाहा. वाबनाहा अयाताल्लिल आलमीन। सूरा 21 अम्बिया आयेत 91.अर्थ- ओ ओरत जिसने अपने स्वतित्व कि हिफाज़त कि थी, हमने उसके भीतर(जाहा फर्जहा शब्द आया) रूह्से फूंका और उसे और उसकी बेटे को दुनिया भर के लिए निशानी बाना दिया।
अब विचार कीजिये, ओ औरत जो अपने स्वतित्व कि हिफाज़त कि थी, हमने उसके भीतर रूह्से फूंका और उसे और उसकी बेटे को दुनिया भर के लिए निशानी बाना दिया। अब रूह किसने फूंका- अल्लाह ने, रूह किसके भीतर फूंका- शर्मगाह के भीतर( जाहा फर्जहा शब्द आया, अरबी में फर्जहा शब्द का अर्थ है शर्मगाह) शर्मगाह किसका- शर्मगाह उस औरत का यानि मरियम का, औरत अपनी स्वतित्व कि हिफाज़त किस अंग से करते है- औरत अपनी स्वतित्व के हिफाज़त अपनी योनि अंग से करते।
आप लीगो को एक बात बताना चाहूँगा, मैंने जो अब्दुल करीम पारीख का आसान कुरानिक कोष का जिक्र किया ये अरबिक शब्द कोष है, कुरान के सबी आयेते का अर्थ यानि तर्जुमा ऐसी अरबिक शब्द कोष से किया जाता है। साथ में कुरान में आया उसी आयेते का उर्दू तर्जुमा का भी प्रमाण दिया, इस आयेते में भी फर्जहा शब्द का उलेख है। सुशील जी के इस पोस्ट पर अब्दुल्लाह जी से कोई जवाब नेही बना तब उस पोस्ट में हम सबी मित्र जन और चर्चा नेही किया. परन्तु अब्दुल्लाह जी ने उनका एक मित्र पाकिस्थान के रमीज़ हबीब के पोस्ट पर झूट बोलने लागे कि हम लोगो ने उनको कोई जवाब नेही दिया, और बार बार उसी पोस्ट पर मुझ से जीद करने लागे, रेफारेंस दो, प्रमाण दो। और मैं भी उनको कहते रहे मेरे मित्र आप को इस बिषय सारे प्रमाण सुशील जी के पोस्ट पर दे दिया आप उस पोस्ट में जाके देख लीजिये, फेर भी जीद करने लागे, तब मैं उनको सुशील जी के उसी debete वाला पोस्ट का linke रमीज़ हबीब के पोस्ट पर ही दे दिया। और मैं ये ही बात कि जानकारी सुशील जी को, सुशील जी के ही दूसरी पोस्ट पर commente करके दे दिया। अब्दुल्लाह जी उहा भी आ गए और शौर मचाने लागे, रेफारेंस दो, प्रमाण दो, डरपोक रेफारेंस क्यों नेही देते।फेर मैं सुशील जी के इस पोस्ट पे भी ओहि debete वाला पोस्ट का लिंक दे दिया, इसमें भी अब्दुल्लाह जी संतुस्ट नेही हुए कहने लागे आयेते बाताओ।मैं भी ओ ही आयेते को दुवारा उन्हें दे दिया। उन्होंने मुझसे कुरान का उसी आयेते से अर्थ करने कहा, फेर हम दोनों में चर्चा हुआ, उस चर्चा में भी अब्दुल्लाह जी से कोई जवाब नेही बन पाया।फेर उन्होंने रात में खुद के i/d पे पंडित महेंद्र पाल आर्य के साथ मेरा नाम जोड़के एक पोस्ट बानाके फेसबुक में डाला, जिसके जवाब में मैं ये पोस्ट कर रहा हूँ।
मित्र मैं आप लोगो को सारे प्रमाण के साथ ये दिखा दिया कि अल्लाह ने किस प्रकार मरियम के शर्मगाह में फूंक मारके इस्सा को पैदा किया था, अब इसी प्रमाण से और भी कुछ सवाल सामने आ गया।
1. अल्लाह ने बिना शारीर से फूंक कैसे मारी ?
2. फूंक मारने के लिए, मु चाहिए, और शारीर के बिना मु होना संभव नेही, कारन मु शारीर से ही युक्त रहते, इसका मतलब ये हुआ फूंक मारने के लिए कुरान का अल्लाह शारीर धारी प्रमाण हो राहा है ?
3. फूंक मारना तभी संभव होगा जब शारीर के भीतर का वायु को बल प्रोयोग करके बाहार किया जायगा, और शारीर के बिना ऐसी असंभव कार्य कभी भी संभव नेही, इस में भी कुरान के अल्लाह के शारीर धारी होने का प्रमाण मिल राहा है।
4.फूंक मारने के लिए कुरान के अल्लाह को किसी एक स्थान में आना पड़ेगा, यानि फूंक मारने के लिए अल्लाह को उस स्थान में, उस समय आना पड़ेगा, जाहा अल्लाह ने फूंक मारी है, और स्थान काल में आना जाना शारीर के बिना कभी भी संभव नेही है।इस प्रमाण से भी कुरान के अल्लाह शारीर धारी प्रमाण हो राहा है।
5.जब इश्वर ने आदि सृष्टी के बाद मानव सृष्टी, स्त्री और पुरुष के मिलन से होने का नियम पूर्वक किया है, अल्लाह खुद उस नियम को कैसे और क्यों तोड़ सकता है ? ऐसी कार्य करने में अल्लाह के सार्थकता क्या था ?
6. क्या अपनी स्वतित्व के हिफाज़त सिर्फ मरियम ने ही किया था? किसी और ने नेही किया था ? फेर अल्लाह के कृपा सिर्फ मरियम के ऊपर ही क्यों? अल्लाह के कृपा किसी और औरत के ऊपर क्यों नेही हुआ ? अल्लाह के कृपा किसी एक के ऊपर होना चाहिए, ना समग्र मानव मात्र के कल्याण के लिए होना चाहिए ?
7. रूह कौनसी थी जो अल्लाह ने फूंका ?
8. रूह कहा से आया था ?
9. कौनसी विज्ञानं से फूंक ने से बच्चा पैदा हो जाता है ?
10. आदि सृष्टी के बाद इश्वर के नियम से बच्चा पैदा होता है, स्त्री और पुरुष के रज और व्रीय के मिश्रण से, पर अल्लाह के फूंक मारने से किस प्रकार से बच्चा पैदा हुआ ?
11. आदि सृष्टी के बाद इश्वर के नियम से स्त्री, पुरुष के मिलन से रज, व्रीय के मिश्रण से मात्रि गर्भ में पहले मानव भूर्ण का सृष्टी होता है, भूर्ण अपनी मा के साथ नाल से युक्त रहता है, और उसी नाल से पुष्टि ग्रहण करके अपनी शारीर का बिकास करके मात्रि गर्भ से बाहार आता है, ये है आदि सृष्टी के बाद इश्वर के नियम पूर्वक मानव सृष्टी, अब कोई इस्लाम के जानकार ये बाताय अल्लाह ने किस प्रकार मरियम के गर्भ में भूर्ण स्थापन किया था ?

मित्र कुरान के इस एक आयेते से ऐसा अनेक प्रश्नों किया जा सकता है, पर इस्लाम के जानकार मेरा किस किस सवाल का जवाब देगा। हायरे बुधि से विचार करने वाले मानव और कब तक तुम लोग मुर्ख बनके रहोगे ?

Not-मैं अपनी इस पोस्ट के message box में अब्दुल्लाह जी से किया, दोनों debete का linke भी दे राहा हूँ , आप लोग उस linke को भी पड़िए और जानिए सत्य क्या है। — with सुशील आर्यवीर and 33 others.

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My remarks:

Tafsir Jalalyn says in sura anbiya ayat -91 that allah breathed into her of gabriel who breathed into ‘the opening of her garment’ . Now the opening of her garment should be near the vagina since that is the entry to the womb where the foetus of Jesus would be developed. SO in any case this allegorical language is pointing towards her vagina , uterus and womb where Jesus would be conceived. Let us  bless ALLAH whose breathing makes men redundant for the job of producing children.

http://www.altafsir.com/Tafasir.asp?tMadhNo=1&tTafsirNo=74&tSoraNo=21&tAyahNo=91&tDisplay=yes&UserProfile=0&LanguageId=2

And, mention Mary, the one who guarded her virginity, [the one who] preserved it from being taken, so We breathed into her of Our spirit, namely, Gabriel, when he breathed into the opening of her garment and she conceived Jesus. And We made her and her son a sign for all the worlds, that is, [for] mankind, jinn and angels, because she bore him without [having] a male [partner].

Double standards in Islam

How can Islam build the proof of the revelation upon the testimony of one woman “ Khadija “?

Yet, when witnesses are needed, it is required to have two men, or one man and two women?

According to Al Quran, Sura Al Baqara, Verse 281:  And call to witness, from among your men, two witnesses. And if two men be not (at hand) then a man and two women, of such as ye approve as witnesses, so that if one of the two erreth (through forgetfulness) the one of them will remind.

So, how can Islam accept the testimony of one woman in a dangerous subject like the revelation?

Thank you Pastor Ahmad for your question, I’ll ask Father Zakaria to reply.

Actually, this is one of the biggest defects in Islam.

First, here there is one witness   a woman, not two women with one man.

Was Waraqa a witness?

No, Waraqa did not see the angel.

We are talking about when Khadija said:  he is an angel and not a demon.

Khadija did not even see the angel! She just asked Muhammad if he could see him or not.

So, she was a witness who did not see anything, and yet she is still considered a witness!

Secondly, Khadija is a woman. Islam, and Muhammad himself, says that women’s minds are deficient and religiously deficient. So how can Islam believe a woman in such a dangerous subject like revelation? Every Muslim should think about these issues for his own benefit.

http://www.islamicreligion.info/2009/02/16/is-islam-based-upon-the-testimony-of-one-woman-khadija/

http://www.youtube.com/watch?v=CBp5dyLHlts#t=49

Arya siddhanti: When a muslim woman is raped and she goes to a shariah court for justice the judge asks her to bring 4  adult male witnesses [As for the rape, a woman alleging rape is required to provide four adult male eyewitnesses;  http://en.wikipedia.org/wiki/Hudood_Ordinance].

Now we observe that Islam stands on the testimony of Khadija a non-muslim [Islam had not arrived yet] alone. Further, she did not see the angel Gabriel/jibril herself.

Why don’t Muslims question these double standards themselves?

Namaste