O Convert, Welcome to the Vedic Dharma

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Can an impotent man consummate a marriage?

http://www.sahih-bukhari.com/Pages/Bukhari_7_63.php

Volume 7, Book 63, Number 186 :
Narrated by ‘Aisha

The wife of Rifa’a Al-Qurazi came to Allah’s Apostle and said, “O Allah’s Apostle! Rifa’a divorced me irrevocably. After him I married ‘Abdur-Rahman bin Az-Zubair Al-Qurazi who proved to be impotent.” Allah’s Apostle said to her, “Perhaps you want to return to Rifa’a? Nay (you cannot return to Rifa’a) until you and ‘Abdur-Rahman consummate your marriage.”

क्या कुरान के अल्लाह को किसी की मदद लेनी पड़ती है ?

क्या कुरान के अल्लाह को किसी को मदत लेना पड़ता है।मित्र इश्वर सर्व शक्तिमान है, इस लिए इश्वर को कोई प्रकार सहायता कि प्रोयोजन नेही होता, इश्वर अपने समर्थ से अपनी सबि कार्य खुद ही कर लेता है। जैसा सृष्टी, पलय, और जीबआत्मा के कर्म फल प्रदान करने मे इश्वर को किसी के सहायता कि कोई प्रोयोजन नेही होता है।परन्तु कुरान के अल्लाह किसी के सहायता बिना खुद अपनी कार्य करने सख्सम नेही है। इस लिए कुरान के अल्लाह को सर्वदा फरिश्तो के सहायता लेना पड़ा।अल्लाह के लिए सबी फ़रिश्ते किस प्रकार मदतगार थे, इसका प्रमाण कुरान में अनेक जागा में मिलते है। उसमे से एक प्रमाण आप लोगो के सामने पेश कर राहा हूँ। और जरुरत पड़ने से आगे और दे दूंगा।
मित्र मुसलमान मित्र जन का कहना है अल्लाह सब का मदतगार है, पर खुद अल्लाह किसी का मदत नेही लेता है। मुसलमान के ऐसी बात के लिए आप लोग जब किसी मुसलमान मित्र से पूछ लेंगे, जब अल्लाह किसी के कोई मदत नेही लेता तो कुरान को कैसे उतारा गया था, ओ ही कुरान जिसे आप लोग कलामुल्लाह मानते है। सच कहता हूँ मित्र आप लोगो के पूछ ने से ही मुसलमान मित्र जनो का बोलती बंद हो जायगा जी। अब देखते है कुरान आया तो आया कैसे।
अल्लाह ने जिब्राइल को कुरान सुनाया और जिब्राइल गारे-हिरा नाम का एक गुफा में आकर पहले हजरत मोहम्मद का सीना चाक किया, यानि मोहम्मद साहब का दिल को निकाला, फेर उसे आवे जमजम से धोया और बाद में उसे मोहम्मद साहब के शारीर में राख कर सिल दिया।जिब्राइल पहले कुरान के पांच आयेते लेके आया था, जिसका प्रमाण मैंने फोटो में दे राखा है। जिसका अर्थ है।
1. पड़ो अपने रब के नाम के साथ जिसने पैदा किया।
2. जमे हुए खून के एक लोथरे से इंसान कि रचना की।
3. पड़ो, और तुम्हारा रब बड़ा उदार है।
4.जिसने कलम के द्वारा ज्ञान कि शिख्सा दी।
5.इन्सानको वह ज्ञान दिया जिसे वह ना जानता था।
———————————–
अब जिब्राइल के इस कारनामा से कुछ सवाल सामने आ गाया है।
1.जब जिब्राइल को मुहम्मद साहब को पड़ाने के लिए ये सब करना पड़ा था, क्या किसी को पड़ाने के लिए उसका सीना चीर के दिल को निकाल के, जमजम के पानी में धोके, फेर उसे शारीर में राख के सिल देने से ही उसे पड़ाना कहता है ?
2.जब अल्लाह ने जिब्राइल को बिना किसी चीर फार के पड़ा सकते है तो मुहम्मद साहब को पड़ाने में अल्लाह को क्या पड़ेशानी हुआ था ?
3.जब मुहम्मद साहब को जिब्राइल ने चीर फार करके पड़ा दिया, तो कुरान किसका कालाम हुआ, जिब्राइल का या अल्लाह का ?
4.किसी के दिल निकाल के फेर उसकी शरीर में दिल लागाने समय ओ आदमी बेहोश हो जाता है, जिब्राइल उस समय पड़ाया था या बाद में पड़ाया था ?
5.क्या एक गुफा के अन्दर इस तरह से सुपर सर्जरी किया जा सकता है।
6.जिब्राइल ने मुहम्मद साहब को पड़ाने के लिए जो सुपर सर्जरी किया था, उस सर्जरी में कौन कौन सा यंत्र का इस्तेमाल किया गया था?
7.जिब्राइल को ऐसी सुपर सर्जरी करना कौन सिखाया था, क्या अल्लाह ने जिब्राइल को सिखाया था ?
8.अल्लाह जिब्राइल जैसे और कुछ फ़रिश्ते को धरती पे भेज देता तो आज कम से कम मुसलमानो को किसी भी सर्जरी में लाखो रूपया गावाना नेही पड़ते।फेसबुक के मित्र जनो मैं तो सिर्फ इस्लाम के थोड़ा सा सच्चाई आप के सामने राख राहा हूँ, इस्लाम में ऐसी अनेक सच्चाई भड़ा पड़ा है।
हायरे बुधि से विचार करने वाले मानव और कब तक तुम लोग ऐसी मुर्ख बनके रहोगे ?

— with Jay AryaAarya SandeepShiva Ji Bharat and 46 others.

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comments
Mahender Pal Arya यह धारणा ही गलत है की अल्लाह किसी का सहयोग नही लेता ? अगर सहयोग न ले तो दुनिया बनाना अल्लाह की बस की बात नहीं ? सबसे पहले अल्लाह ने कुन कहा होजा ? जब कोई वस्तु अभी बनायाही नहीं गया तो किस को कहा -होजा एक आदेश है होने का कारण क्या है ? कौन कौन जी वस्तुवों के द्वारा होना है,यह इस्लाम नहींजानता और न अल्लह ही इसका जवाब देसकता ? फिर आदम को बनाने के लिए मिट्टी मंगवानी पड़ी अब जो मिट्टी लाया अल्लाह उसके अधीन होगया ?वह मुर्ख है जो कहता है की अल्लाह किसीका मोहताज नहीं ? अल्लाह हर मुस्लमान के दोनों कन्धों पर दो फ़रिश्ते बिठाया नेकी -और बदी को लिखवाता है ? अल्लाह उस किराबीन और कातेबीन के अधीन है ? हर मुस्लमान के रूह [आत्मा] निकालने के लिए, मालेकुल मौत [मौतकी मलिक] जिब्रील , दुनिया को फ़ना करने के लिए इस्राफील सुर फुंकेगे , फिर कबर में सवाल करने को ,मुनकिर ,और नकीर , दो फ़रिश्ते आएंगे अदि ,इसप्रकार अनेक फ़रिश्ते है अल्लाह जिन से कम लेते हैं -उनके बिना अल्लाह का काम चलही नहीं सकता | यह अज्ञानता है जो यह कहते की अल्लाह किसी का मोहताज नहीं

  • Golam Mustarshid Alquadry Vedic iswar ko sristi k liye prakriti k mohtaj hona parta hai prakri isi karan unke nikat anadi hai,
    aur faristo se madad lena iska arth ye hai k badsaj apne noukar ko kaam karne ka adesh de raha hai raja chote se chota kaam v noukar se karwata hai to kya wo us chote kaam me noukar ka mohtaj hoga
  • Shiva Ji Bharat Jab ye prakriti (space) he ni tha to Kuran ka allaa aur uske farishte rahate kaha the…..musalman bolegaa jannat me to jannat kaha stheet tha bhai jab koi space he ni tha to….musalman bhai thodi roshni daloge kyaa ispar
    सुशील आर्यवीर मुश्तरशिद
    ईश्वर प्रकृति का मोहताज नहीँ वो कैसे अभी बताता हूँ पहले आप बतायेँ क्या कुरान का ज्ञान मुहम्मद को देने के लिए खुदा जिब्रील का मोहताज था या नहीँ अगर नही था तो सीधा कुरआन मुहम्मद पर क्योँ न आया
    दूसरी बात कुरआन का अल्लाह खुद घोषणा कर रहा है कि वो मोहताजी है कैसे देखो कुरआन शरीफ सूरा मुहम्मद आयत 7
    तर्जुमा
    हे वे लोग जो ईमान लाये हो यदि तुम अल्लाह की मदद करोगे तो वह तुम्हारी मदद करेगा और तुम्हारे कदमोँ को जमा देगा
    Vaibhav Kaushik Yeh raha Sushilji.. Surah Muhammad Ayat 7
    1450856_258269647657213_1235721829_n
    My comments
    [Observe: Allah, his messenger and their contract with the muslims]
    O you who believe! If you help God, that is to say, His religion and His Messenger, He will help you, against your enemy, and make your foothold firm, He will make you stand firm [while you fight] on the battleground.

अल्लाह ने …….. फूंका और मरियम को बच्चा पैदा हुआ

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इस्लाम अल्लाह अल्लाह करके गला फाड़ने वाला Abdullah Is Back जी ने फेसबुक में अपनी पोस्ट डाल के फेर से फंसा दिया इस्लाम को।

मित्र काल रात पंडित Mahender Pal Arya जी और मेरा नाम लेके एक पोस्ट फेसबुक में अब्दुल्लाह जी के दुयारा डाला गया। इस में अब्दुल्लाह जी ने दावा किया पंडित जी और हमलोग कुरान के आयेते के गलत अर्थ करके कुरान के ऊपर अपशब्द का प्रोयोग किया। जब मैं अब्दुल्लाह जी के ये पोस्ट देखा, इसका जवाब देना उचीत समझा, ताकि फेसबुक के सबी मित्र जनो को सत्य ज्ञान हो जाय। अब्दुल्लाह जी इस्लाम के बचाव के लिए किस प्रकार झूट बोलते है उसका जीता जागता प्रमाण आप लोगो को मेरे इस पोस्ट पर ही मिल जायगा। आप लोग ध्यान पूर्वक पड़े।
मित्र कुछ दिन पहले सुशील आर्यवीर जी के ” खतना ” पोस्ट पर मैंने कुछ commente किया था. मेरा उस commente के सवाल जवाब के आगे अब्दुल्लाह जी से कुरान के ” सूरा 21अम्बिया आयेत 91″ के ऊपर debete हुआ था। इस आएते का अर्थ है- अल्लाह ने मरियम के शर्मगाह में फूंक मारके मरियम और उसके बेटे को दुनिया भर के लिए निशानी बाना दिया है। इस बिषय पे लगातार तीन दिन अब्दुल्लाह जी से हम लोगो का debete हुआ था, और आखरी में जब सबी प्रमाण के साथ हम ने उनको दिखा दिया, कि खुद उनके ही इस्लाम के जानकार अब्दुल करीम पारीख जी ने भी अपनी आसान कुरानिक कोष में भी आयेते में आया फर्जहा शब्द का अर्थ शर्मगाह ही किया तब जाके इनका बाहेस ख़तम हुआ था। निचे कुरान के उसी आयेते का लिख रहा हु।देखिये-
वल्लती अह्सनत फर्जहा फ़ना फखना फिहा मिरुहेना वजायलनाहा. वाबनाहा अयाताल्लिल आलमीन। सूरा 21 अम्बिया आयेत 91.अर्थ- ओ ओरत जिसने अपने स्वतित्व कि हिफाज़त कि थी, हमने उसके भीतर(जाहा फर्जहा शब्द आया) रूह्से फूंका और उसे और उसकी बेटे को दुनिया भर के लिए निशानी बाना दिया।
अब विचार कीजिये, ओ औरत जो अपने स्वतित्व कि हिफाज़त कि थी, हमने उसके भीतर रूह्से फूंका और उसे और उसकी बेटे को दुनिया भर के लिए निशानी बाना दिया। अब रूह किसने फूंका- अल्लाह ने, रूह किसके भीतर फूंका- शर्मगाह के भीतर( जाहा फर्जहा शब्द आया, अरबी में फर्जहा शब्द का अर्थ है शर्मगाह) शर्मगाह किसका- शर्मगाह उस औरत का यानि मरियम का, औरत अपनी स्वतित्व कि हिफाज़त किस अंग से करते है- औरत अपनी स्वतित्व के हिफाज़त अपनी योनि अंग से करते।
आप लीगो को एक बात बताना चाहूँगा, मैंने जो अब्दुल करीम पारीख का आसान कुरानिक कोष का जिक्र किया ये अरबिक शब्द कोष है, कुरान के सबी आयेते का अर्थ यानि तर्जुमा ऐसी अरबिक शब्द कोष से किया जाता है। साथ में कुरान में आया उसी आयेते का उर्दू तर्जुमा का भी प्रमाण दिया, इस आयेते में भी फर्जहा शब्द का उलेख है। सुशील जी के इस पोस्ट पर अब्दुल्लाह जी से कोई जवाब नेही बना तब उस पोस्ट में हम सबी मित्र जन और चर्चा नेही किया. परन्तु अब्दुल्लाह जी ने उनका एक मित्र पाकिस्थान के रमीज़ हबीब के पोस्ट पर झूट बोलने लागे कि हम लोगो ने उनको कोई जवाब नेही दिया, और बार बार उसी पोस्ट पर मुझ से जीद करने लागे, रेफारेंस दो, प्रमाण दो। और मैं भी उनको कहते रहे मेरे मित्र आप को इस बिषय सारे प्रमाण सुशील जी के पोस्ट पर दे दिया आप उस पोस्ट में जाके देख लीजिये, फेर भी जीद करने लागे, तब मैं उनको सुशील जी के उसी debete वाला पोस्ट का linke रमीज़ हबीब के पोस्ट पर ही दे दिया। और मैं ये ही बात कि जानकारी सुशील जी को, सुशील जी के ही दूसरी पोस्ट पर commente करके दे दिया। अब्दुल्लाह जी उहा भी आ गए और शौर मचाने लागे, रेफारेंस दो, प्रमाण दो, डरपोक रेफारेंस क्यों नेही देते।फेर मैं सुशील जी के इस पोस्ट पे भी ओहि debete वाला पोस्ट का लिंक दे दिया, इसमें भी अब्दुल्लाह जी संतुस्ट नेही हुए कहने लागे आयेते बाताओ।मैं भी ओ ही आयेते को दुवारा उन्हें दे दिया। उन्होंने मुझसे कुरान का उसी आयेते से अर्थ करने कहा, फेर हम दोनों में चर्चा हुआ, उस चर्चा में भी अब्दुल्लाह जी से कोई जवाब नेही बन पाया।फेर उन्होंने रात में खुद के i/d पे पंडित महेंद्र पाल आर्य के साथ मेरा नाम जोड़के एक पोस्ट बानाके फेसबुक में डाला, जिसके जवाब में मैं ये पोस्ट कर रहा हूँ।
मित्र मैं आप लोगो को सारे प्रमाण के साथ ये दिखा दिया कि अल्लाह ने किस प्रकार मरियम के शर्मगाह में फूंक मारके इस्सा को पैदा किया था, अब इसी प्रमाण से और भी कुछ सवाल सामने आ गया।
1. अल्लाह ने बिना शारीर से फूंक कैसे मारी ?
2. फूंक मारने के लिए, मु चाहिए, और शारीर के बिना मु होना संभव नेही, कारन मु शारीर से ही युक्त रहते, इसका मतलब ये हुआ फूंक मारने के लिए कुरान का अल्लाह शारीर धारी प्रमाण हो राहा है ?
3. फूंक मारना तभी संभव होगा जब शारीर के भीतर का वायु को बल प्रोयोग करके बाहार किया जायगा, और शारीर के बिना ऐसी असंभव कार्य कभी भी संभव नेही, इस में भी कुरान के अल्लाह के शारीर धारी होने का प्रमाण मिल राहा है।
4.फूंक मारने के लिए कुरान के अल्लाह को किसी एक स्थान में आना पड़ेगा, यानि फूंक मारने के लिए अल्लाह को उस स्थान में, उस समय आना पड़ेगा, जाहा अल्लाह ने फूंक मारी है, और स्थान काल में आना जाना शारीर के बिना कभी भी संभव नेही है।इस प्रमाण से भी कुरान के अल्लाह शारीर धारी प्रमाण हो राहा है।
5.जब इश्वर ने आदि सृष्टी के बाद मानव सृष्टी, स्त्री और पुरुष के मिलन से होने का नियम पूर्वक किया है, अल्लाह खुद उस नियम को कैसे और क्यों तोड़ सकता है ? ऐसी कार्य करने में अल्लाह के सार्थकता क्या था ?
6. क्या अपनी स्वतित्व के हिफाज़त सिर्फ मरियम ने ही किया था? किसी और ने नेही किया था ? फेर अल्लाह के कृपा सिर्फ मरियम के ऊपर ही क्यों? अल्लाह के कृपा किसी और औरत के ऊपर क्यों नेही हुआ ? अल्लाह के कृपा किसी एक के ऊपर होना चाहिए, ना समग्र मानव मात्र के कल्याण के लिए होना चाहिए ?
7. रूह कौनसी थी जो अल्लाह ने फूंका ?
8. रूह कहा से आया था ?
9. कौनसी विज्ञानं से फूंक ने से बच्चा पैदा हो जाता है ?
10. आदि सृष्टी के बाद इश्वर के नियम से बच्चा पैदा होता है, स्त्री और पुरुष के रज और व्रीय के मिश्रण से, पर अल्लाह के फूंक मारने से किस प्रकार से बच्चा पैदा हुआ ?
11. आदि सृष्टी के बाद इश्वर के नियम से स्त्री, पुरुष के मिलन से रज, व्रीय के मिश्रण से मात्रि गर्भ में पहले मानव भूर्ण का सृष्टी होता है, भूर्ण अपनी मा के साथ नाल से युक्त रहता है, और उसी नाल से पुष्टि ग्रहण करके अपनी शारीर का बिकास करके मात्रि गर्भ से बाहार आता है, ये है आदि सृष्टी के बाद इश्वर के नियम पूर्वक मानव सृष्टी, अब कोई इस्लाम के जानकार ये बाताय अल्लाह ने किस प्रकार मरियम के गर्भ में भूर्ण स्थापन किया था ?

मित्र कुरान के इस एक आयेते से ऐसा अनेक प्रश्नों किया जा सकता है, पर इस्लाम के जानकार मेरा किस किस सवाल का जवाब देगा। हायरे बुधि से विचार करने वाले मानव और कब तक तुम लोग मुर्ख बनके रहोगे ?

Not-मैं अपनी इस पोस्ट के message box में अब्दुल्लाह जी से किया, दोनों debete का linke भी दे राहा हूँ , आप लोग उस linke को भी पड़िए और जानिए सत्य क्या है। — with सुशील आर्यवीर and 33 others.

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My remarks:

Tafsir Jalalyn says in sura anbiya ayat -91 that allah breathed into her of gabriel who breathed into ‘the opening of her garment’ . Now the opening of her garment should be near the vagina since that is the entry to the womb where the foetus of Jesus would be developed. SO in any case this allegorical language is pointing towards her vagina , uterus and womb where Jesus would be conceived. Let us  bless ALLAH whose breathing makes men redundant for the job of producing children.

http://www.altafsir.com/Tafasir.asp?tMadhNo=1&tTafsirNo=74&tSoraNo=21&tAyahNo=91&tDisplay=yes&UserProfile=0&LanguageId=2

And, mention Mary, the one who guarded her virginity, [the one who] preserved it from being taken, so We breathed into her of Our spirit, namely, Gabriel, when he breathed into the opening of her garment and she conceived Jesus. And We made her and her son a sign for all the worlds, that is, [for] mankind, jinn and angels, because she bore him without [having] a male [partner].

Allah’s plans and plots

6.110
Sahih International

And We will turn away their hearts and their eyes just as they refused to believe in it the first time. And We will leave them in their transgression, wandering blindly.

Sahih International

And even if We had sent down to them the angels [with the message] and the dead spoke to them [of it] and We gathered together every [created] thing in front of them, they would not believe unless Allah should will. But most of them, [of that], are ignorant.

Sahih International

And thus We have made for every prophet an enemy – devils from mankind and jinn, inspiring to one another decorative speech in delusion. But if your Lord had willed, they would not have done it, so leave them and that which they invent.

Sahih International

And [it is] so the hearts of those who disbelieve in the Hereafter will incline toward it and that they will be satisfied with it and that they will commit that which they are committing.

http://quran.com/6

conclusion: allah plans and plots ===>> divide humanity and rule them !!! After all he has made jannat and jahannum and needs to populate both the places.  Glory to the plotter!

Note: Vedas say that heaven and hell are a state of a person [on earth].

Mulla Naseeruddin -nigrah sthan -II

The Light Of Truth-सत्यार्थ प्रकाश · 5,885 like this 9 hours ago ·

सुशील आर्यवीर भाई और मिया मुशफिक के बीच शाश्त्रार्थ मे मिया मुशफिक से उत्तर देते ही नहीं बना और वो बीच मे ही गायब हो गए , जाने सूरज ने अपने साथ कीचड़ मे डुबो दिया या फिर प्रथ्वी नाम की चटाई ने इनको लपेट लिया ….आइये मित्रोँ आपको कुरआन से एक ऐसी बात बतायेँगे जो हैरान करने वाली और आलिमोँ के सामने चुनौती वाली है, और हम चुनौती देते हैँ इस्लाम जगत को कि वो इसका उत्तर दे,

सुशील आर्यवीर जी का प्रश्न मुशफिक से—- कि कुरआन शरीफ़ सूरा अल हाक़्क़ा,आयत 14, और धरती और पहाड़ उठा कर चूर्ण विचूर्ण कर दिये जायेँगे एक ही बार मेँ। आगे आयत नम्बर 16 और आकाश फट जावेगा और उस दिन उसके बंधन ढीले पड़ चुके होँगे। आर्योँ ये तो कुरआन मेँ कियामत का बयान है कि कियामत के दिन अल्लाह ऐसा करेँगे अर्थात् धरती और आकाश को खत्म कर देँगे, पर देखो सूरा हूद आयत नम्बर 107 और 108, कुरआन फ़रमाती है वे सदैव उसी मेँ रहेँगे जब तक आकाश और धरती स्थिर है। यहाँ दोजख की बात हो रही है जो इसके ऊपर की आयतोँ को पढ़ने से मालूम हो जायेगा, आगे जन्नत के बारे मेँ सुनो- और रहे वे लोग जो भाग्यवान होँगे तो वे जन्नत मेँ होँगे जहाँ वे सदैव रहेँगे जब तक कि आकाश और धरती स्थिर है। अब आलिमोँ ये बताओ जब कियामत मेँ धरती और आकाश का वजूद खत्म हो जायेगा तब ये धरती और आकाश कौन से होँगे जो जन्नत और दोजख की स्थिरता का कारण बनेँगे? और जन्नत दोजख तो सदैव रहने वाली है क्या धरती और आकाश भी सदैव रहेँगे? अगर सदैव रहेँगे तो फिर हम धरती को चूर्ण और आकाश को फाड़ देगे पिघली धातु का करेँगे, कैसे सम्भव है? —

मुशफिक का उत्तर—– यह तो ‘खोदा पहाड़ निकला चूहा’ वाली बात हो गई। च्नौती का शब्द देख के तो मुझे लगा कि कोई कठिन प्रश्न होगा जिसका उत्तर ढूंढने में मुझे समय लगेगा। पर चुनौती भरा प्रश्न देख कर पता चला कि इसका उत्तर तो स्वयं कुरआन ने दिया हुआ है। लगता है सवाल करने वाले ने पूरे कुरआन का अध्ययन नहीं किया। सोचा होगा बड़ा तीर मारा है सवाल पूछके। याद रहे कि ये उसी स्वामी के अनुयायी हें जिसने आज आपने जमाने में कुरआन पर आक्षेप करते हुए पूछा था “यदि लोहे या पत्थरों की नौका बनाकर समुद्र में छलावे तो खुदा की निशानी डूब जाए या नहीं?” [सत्यार्थ प्रकाश समुल्लास 14, नंबर 124] स्वामी जी आज ज़िंदा होते तो लोहे की नौका को समुद्र में चलता देखते। पर आज तक इनके अनुयायियों ने अपना सबक नहीं सीखा। आर्य बंधु ने पूछा “जब कियामत मेँ धरती और आकाश का वजूद खत्म हो जायेगा तब ये धरती और आकाश कौन से होँगे जो जन्नत और दोजख की स्थिरता का कारण बनेँगे?” कुरआन अवश्य कहता है कि यह धरती और आकाश खतम हो जाएंगे पर साथ ही कुछ और भी कहता है। ज़रा ध्यान से सुनिए يَوْمَ تُبَدَّلُ الْأَرْضُ غَيْرَ الْأَرْضِ وَالسَّمَاوَاتُ ۖ وَبَرَزُوا لِلَّهِ الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ “उस दिन यह धरती दूसरी धरती से बदल दी जाएगी और आकाश भी। और वे सब के सब अल्लाह के सामने खुलकर आ जाएँगे, जो अकेला है, सबपर जिसका आधिपत्य है” [सूरह इब्राहीम 14: आयत 48] कुरआन मजीद कितनी अजीब किताब है कि 1400 वर्ष बाद पूछे जाने वाले सवाल का जवाब इस में पहले से दिया हुआ है। यह धरती और आकाश एक नए धरती और आकाश में परिवर्तित होगी जिसकी अपनी अलग शान होगी अपने अलग प्रकृतिक नियम होने और न जाने क्या। तो कुरआन की दो आयात में कोई विरोधाभास नहीं। काश ये लोग कुरआन को ध्यान से पढ़ते जैसा कि कुरआन स्वयं बयान करता है أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ الْقُرْآنَ أَمْ عَلَىٰ قُلُوبٍ أَقْفَالُهَا “तो क्या वे क़ुरआन में सोच-विचार नहीं करते या उनके दिलों पर ताले लगे हैं?” [सूरह मुहम्मद 47: आयत 24]

सुशील जी का पुनः प्रश्न मुशफिक के उत्तर पर —- मुश्फिक भाई उत्तर देने के लिए धन्यवाद।कुछ लोगोँ को लगा होगा भई बड़ा जबरदस्त उत्तर दिया आपने, आइये देखते हैँ, आपने कहा खोदा पहाड़ निकली चुहिया, मैने क्या कहा था कि शेर निकलेगा, खैर कुछ न कुछ तो आपके हाथ लगा चुहिया ही सही, आगे आपने कहा आपने ध्यान से नहीँ पढ़ा, भई पढ़ा और ये बात भी मालूम है कि कुरान सृष्टि का निर्माण दोबारा करेगा, देखो कुरआन सूरा अल अंबिया, आयत 104, वह दिन जबकि हम आकाश को लपेट लेँगे( ये अलग बात है कि अल्लाह और मुहम्मद को ये मालुम न था कि आकाश किसे कहते हैँ) जैसे पंजी मेँ पन्नोँ को लपेट दिया जाता है। जिस तरह हमने प्रथम रचना का आरम्भ किया था, उसी तरह हम फिर उसकी पुरनरावृत्ति करेँगे, यह हमारे जिम्मेँ एक वादा है। निश्चय ही हमेँ यह करना है। आपने जो आयत दी कि आकाश और धरती बदल दी जायेगी उस आयत के मुकाबिल ये आयत ज्यादा ठीक है, जो कि आपकी आयत को पूरा पूरा एक्सपलेन करती है, मुश्फिक आर्योँ का तर्क इतना कमजोर नहीँ जितना आप समझते हैँ, हम दार्शनिक बात करते हैँ और इस्लाम वालोँ का दार्शनिकता से कोई लेना देना नहीँ, और जो आयत आपने और मैँने दी ही उससे तो इस्लाम का अकीदा ही नेस्तेनाबुद हो जाता है, क्योँकि इस्लाम मानता हैँ कि सृष्टि दोबारा नहीँ बनेगी, लोगोँ का पुनर्जन्म नहीँ होगा, क्योँकि दार्शनिक भाषा मेँ पुनरजन्म का नाम ही पुनरावृत्ति है, आप बतायेँ क्या ये जो सृष्टि दोबारा बनेगा उसका कभी विनाश नहीँ होगा, क्योँकि जन्नत और दोजख तो सदैव रहने वाली है, और अगर विनाश नहीँ होगा तो आयत मेँ ये क्योँ कहा गया कि जब तक आकाश और धरती स्थिर हैँ, भई अगर स्थिर हैँ तो कब तक क्योँकि स्थिरता का कहना ही दर्शा रहा है कि इनका भी विनाश होगा, और जब इनका विनाश होगा तो दोजख जन्नत सदैव रहने वाली कैसे? अल्लाह का कोई काम निष्प्रयोजन नहीँ होता, जब आकाश और धरती को दोबारा बनायेगा तो किस प्रयोजन के लिए? क्या फिर से धरती पर मखलूक होगी? अगर नहीँ तो प्रयोजन बताईये? खैर कुरान ने तो बता दिया दोबार पुनरावृत्ति करेँगे इसका मतलब वो फिर से वैसा ही सामान और मखलूक बनायेँगे। आप दयानन्द जी को बीच मेँ लायेँ उस पर भी आपको बता दूँ किश्ती का दर्या पर चलना खुदा कि निआमत बताना मूर्खता है, क्योँकि अगर किश्ती डूब जायेँ लकड़ी की भी ड़ूबती है तो क्या अल्लाह की निआमत और निशानियाँ डूब जायेगी? ट, और लोहे की या पत्थर की हो तो, तो भाई अगर लोहे की भी अक्ल लगा के न बनाई जाये तो वो भी डूब जायेगी, अब अगर मानवोँ नेँ लोहे की नौका भी चला ली और कुछ दिन बाद पत्थर की भी अपनी अक्ल लगाकर चलाने लगे तो इसमेँ ऋषि पर आक्षेप कैसा? ऋषि ने तो लिख दिया नौका मनुष्य और क्रिया कौशलादि से चलती है। इसमेँ आपके खुदा की नेअमत औ निशानी कैसे? पहले आक्षेप करना का मकसद तो समझो। आपने कहा- काश ये लोग कुरआन को ध्यान से पढ़ते जैसा कि कुरआन स्वयं बयान करता है أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ الْقُرْآنَ أَمْ عَلَىٰ قُلُوبٍ أَقْفَالُهَا “तो क्या वे क़ुरआन में सोच-विचार नहीं करते या उनके दिलों पर ताले लगे हैं?” [सूरह मुहम्मद 47: आयत 24] बताओ तो ये ताले लगाये किसने आपकी कुरआन फरमाती है कि अल्लाह ने इनके कानो और दिलोँ मे ठप्पा लगा दिया है, उनके दिलोँ मेँ एक रोग था और हमने रोग को और बढ़ा दिया, यही नहीँ क्या तुमने देखा नहीँ कि हमने इन काफीरोँ पर शैतानोँ को छोड़ रखा है जो इन्हेँ उकसाते रहते हैँ( सूरा मरयम,आयत 83) तो मुश्फिक अपने अल्लाह को कोशो हमेँ नहीँ, क्योँकि ठप्पा वही लगाते, रोग वही बढ़ाते और वही उकसवाते रहते हैँ। हाँ आज अगर मुहम्मद होते तो हम जरुर पूछते सगे भाई बहन का मुबाशरत जायज है या नाजायज???????

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