ved and shudra

 

From page 68:

(1) The Vedas do not know any such race as the Aryan race.

(2) There is no evidence in the Vedas of any invasion of India by the Aryan race and its having conquered the Dasas and Dasyus, supposed to be natives of India.

(3) There is no evidence to show that the distinction between Aryans, Dasas and Dasyus was a racial distinction.

(4) The Vedas do not support the contention that the Aryans were different in colour from the Dasas and Dasyus

Source: https://drambedkarwas.files.wordpress.com/2010/10/who-were-the-shudras.pdf

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इस्लाम में बुरका प्रथा की शुरुआत और बुर्के से होने वाली हानियां………. पार्ट 2

 

नोट : लेख थोड़ा बड़ा जरूर है, पर पढ़ना जरुरी है

पिछली लेख में आपने जाना की भारतीय संस्कृति तथा वैदिक सभ्यता में कहीं भी पर्दा प्रथा नहीं पायी जाती, ये प्रथा विशुद्ध रूप से इस्लामी समाज की देन है, और हिन्दू जाति को अपनी बहन बेटियो की सुरक्षा हेतु पर्दा प्रथा का आरम्भ करना पड़ा, इसी विषय पर आज हम आपको समझाने की कोशिश करेंगे की आखिर इस्लाम में बुरका प्रथा की शुरुआत कैसे हुई और बुर्के से होने वाली हानियां तथा बुर्के का महिलाओ पर प्रभाव आदि।

आइये पहले देखते हैं बुरका प्रथा पर मुस्लिम समाज की मान्य मजहबी पुस्तक “क़ुरान” क्या कहती है :

और मोमिन महिलाओ से कह दे की वे भी अपनी आँखे नीची रखा करे और अपने गुप्त अंगो की रक्षा किया करे एवं अपने सौंदर्य को प्रकट न किया करे सिवाय उस के जो मज़बूरी और बेबसी से आप ही आप जाहिर (जैसे शरीर का लम्बा, छोटा, मोटा व दुबलापन होना) हो जाये और अपनी ओढ़नियो को अपनी छातियो पर से गुजर कर और उसे ढक कर पहना करे तथा वे केवल अपनी पतियों, अपने पिताओ या अपने पतियों के पिताओ या अपने पुत्रो या अपने पतियों के पुत्रो या अपने भाइयो या अपने भाइयो के पुत्रो (भतीजो) या अपनी बहनो के पुत्रो या अपने जैसी स्त्रियों या जिन के स्वामी उन के दाहिने हाथ हुए हैं (अर्थात लौंडिया) या ऐसे अधीन व्यक्तियों (अर्थात नौकर चाकर) पर जो अभी युवावस्था को नहीं पहुंचे या ऐसे बच्चो पर जिन्हे अभी स्त्रियों के विशेष सम्बन्धो का ज्ञान नहीं हुआ, अपना सौंदर्य प्रकट कर सकती हैं तथा इन के सिवा किसी पर भी जाहिर न करे और अपने पाँव (धरती पर जोर से) इसलिए न मारा करे की वह चीज़ जाहिर हो जाये जिसे वे अपने सौंदर्य में से छिपा रही है। और हे मोमिनो ! तुम सब के सब अल्लाह की और झुक जाओ ताकि तुम सफलता पा सको।
(क़ुरान २४:३२)

एक और आयत जो इसी विषय से सम्बंधित है,

हे नबी ! अपनी पत्नियों, अपनी पुत्रियों तथा मोमिनो की पत्नियों से कह दे की वे (जब बाहर निकल तो) अपनी बड़ी चादरों को अपने सिरो पर से आगे खींच कर अपने सीनो तक ले आया करे। ऐसा करना इस बात को संभव बना देता है की वे पहचानी जाए और उन्हें कोई कष्ट न दे सके तथा अल्लाह बड़ा क्षमा करने वाला और बार बार दया करने वाला है।
(क़ुरान ३३:६०)

उपरोक्त वर्णित दो आयतो में से प्रथम आयत का उद्देश्य है की महिलाये अपने श्रृंगार को पुरषो से छुपाये और दूसरी आयत में स्पष्ट बता दिया है की घर से बाहर जाने पर बुरका पहनने से छेड़छाड़ और उत्पीड़न से मुस्लिम महिलाओ का बचाव होता है। यहाँ ध्यान से सोचने की बात है की पुरषो के लिए कोई ऐसी व्यवस्था नहीं पायी जाती की वो भी चादर डालकर महिलाओ से खुद का बचाव करे, ये सारी पाबन्दी आखिर महिला तक ही सीमित क्यों ? क्या ये अल्लाह का स्त्री पुरुष में भेदभाव नहीं ? कुछ पॉइंट जो इन आयतो पर उठ खड़े होते हैं जरा गौर करिये :

1. क्या बिना बुरका पहने किसी महिला की सुंदरता इतनी होती है की पुरुष अपना नियंत्रण खो बैठता है ? यदि ये बात सही है तो फिर जो इसी आयत में बताया की अपने भाई, पिता आदि के आगे बिना बुरका भी बैठो, ये कैसे संभव है ?

2. महिलाये पुरुषो की तरफ आकर्षित नहीं होती, ये कटु सत्य है, और पूरी दुनिया की महिलाओ में एक बड़ा भाग उन महिलाओ का है जो कामुक नहीं होती। बेहद ही कम संख्या में ऐसी असभ्य महिलाये पायी जाती हैं जो अत्यधिक कामुक हो।

3. महिलाये, पुरुषो की तुलना में अधिक संयमी और स्व नियंत्रक होती हैं, ऐसे में भी बुरका उढ़ाने और सौंदर्य छिपाने का कोई औचित्य नहीं, बेहतर होता की पुरुषो को दिशा निर्देश जारी किये जाते, मगर खेद की पुरुषो के लिए कोई दिशा निर्देश क़ुरान में नहीं पाये जाते।

अब तक आप समझ गए होंगे की बुरखा प्रथा से महिलाओ की सुंदरता छुपने और छेड़छाड़ उत्पीड़न बंद होना संभव नहीं, क्योंकि बिना पुरुषो को सभ्यता सिखाये ये सब बंद नहीं हो सकता, क्योंकि महिलये वैसे ही संयमी होती है, कोई कम संख्या की कामुक महिलाये मात्र एक अपवाद है, यदि क़ुरान ये समझाना चाह रहा है की महिलाये कामुक और असंयमी होती है, तो ये क़ुरान के अल्लाह मियां और मुहम्मद साहब का दुनिया की सभी महिलाओ पर बेमाना इल्जाम है, लेकिन अल्लाह मिया और मुहम्मद साहब ऐसे तो न हुए होंगे, इसलिए सच्चाई जानना जरुरी है, आइये हम दिखाते हैं की ये आयते आखिर क़ुरआन के जरिये क्यों नाजिल हुई, देखिये :

मुहम्मद साहब की पत्नी आयशा ने बताया की पैगम्बर साहब की पत्निया अल मनासी के विशाल खुली जगह जो बकि अत मदीना के नजदीक थी, रात्रि में पेशाब करने हेतु जाती थी। उमर साहब ने पैगम्बर साहब को बोला अपनी पत्नियों को परदे में रखिये लेकिन अल्लाह के रसूल ने ऐसा न किया। एक रात ऐसा हुआ कि पैगम्बर साहब की एक पत्नी जिनका नाम सउदा बिन्त ज़मआ था जो एक लम्बी महिला थी इशा के समय बाहर (पेशाब करने) गयी। उमर साहब ने महिला को सम्बोधन करते हुए कहा कहा “मैंने तुम्हे पहचान लिया है, तुम सउदा हो”, ऐसा उन्होंने कहा क्योंकि वो बेसब्री से इन्तेजार कर रहे थे अल हिजाब (मुस्लिम महिलाओ द्वारा परदे का अवलोकन) आयतो के नाजिल होने की। इसलिए अल्लाह ने अल हिजाब (आँखे छोड़ पूर्ण शरीर को चादर से ढकना) आयत नाजिल की।
(सही बुखारी, जिल्द १, किताब ४ हदीस १४८)

बिलकुल यही हदीस, सही बुखारी में जिल्द ८ किताब ७४ हदीस २५७ में भी द्रष्टव्य है, इसके अतिरिक्त सही मुस्लिम किताब २६ हदीस ५३९७ भी यही बताती है की महिलाओ को बुरखा पहनने वाली आयत, उमर साहब द्वारा पेशाब जाती महिलाओ को पहचानने से बचाने हेतु नाजिल की गयी।

अब जरा कुछ समझने की कोशिश करते हैं, देखिये :

1. उपरोक्त हदीसो से ज्ञात होता है कि उमर साहब बार बार पैगम्बर मुहम्मद साहब से महिलाओ को चादर (बुरखा) से ढकने वाली आयते अल्लाह से नाजिल करने को दोहरा रहे थे ताकि क़ुरान में महिलाओ के लिए चादर (बुरखा) से ढकना अनिवार्य हो जाए।

2. उपरोक्त हदीसो से साफ़ ज्ञात है की ये अल हिजाब की आयते अल्लाह द्वारा नाजिल नहीं की गयी, क्योंकि ये उमर साहब की मांग थी जिसे मुहम्मद साहब ने पूरा किया।

3. उमर साहब ने मुहम्मद साहब की एक पत्नी जो खुद को राहत देने (पेशाब) करने गयी थी, उनका पीछा किया, न केवल पीछा किया, बल्कि “सउदा” नाम से भी पुकारा जो किसी भी हालत में ठीक नहीं था, क्योंकि मुहम्मद साहब की पत्निया मुस्लिमो की माँ सामान है।

4. सउदा जो मुहम्मद साहब की पत्नी थी उन्होंने घर जाकर, उमर साहब द्वारा किये बेहूदे और शर्मिंदगी वाले काम की शिकायत मुहम्मद साहब से की थी (सही बुखारी जिल्द ६ किताब ६० हदीस ३१८) (सही मुस्लिम किताब २६ हदीस ५३९५)

5. इन सब कार्यो के बाद ही और जो उमर साहब चाहते थे, उसे पूरा करने हेतु हिजाब वाली आयते नाजिल की गयी।

इन सबको पढ़ने से निष्कर्ष निकलता है की उमर साहब की हिजाब आयतो की मांग से पहले तो मुहम्मद साहब खुद भी राजी नहीं थे, मगर उमर साहब के कामो के बाद अल्लाह तक राजी हो गया जो हिजाब की आयत उतारी ? क्या ये इंसाफ है ?

लेकिन एक और चौंकाने वाली बात का खुलासा हदीस में होता है, की हिजाब वाली आयते नाजिल होने बाद, मुहम्मद साहब की पत्निया बुर्के में आने जाने लगी, मगर उमर साहब को इससे भी चैन नहीं आया, वो फिर भी मुहम्मद साहब की पत्नी का पीछा करते रहे, देखिये (सही बुखारी जिल्द ६ किताब ६० हदीस ३१८)

जरा सोचिये क्या हिजाब या बुरखा यहाँ महिलाओ के काम आया ?

उपरोक्त क़ुरानी आयतो में बताया है की बुरका, महिलाओ को पुरुषो की अवांछित वासनामयी दृष्टि से बचाव करता है, आइये इस विषय पर भी इस हदीस का अवलोकन करे :

मुहम्मद साहब की पत्नी आयशा ने बताया की एक नपुंसक (हिजड़ा पुरुष) पैगम्बर साहब की पत्नियों के यहाँ आया जाया करता था और उनको (पैगंबर) को इस बात पर कोई आपत्ति नहीं थी क्योंकि वो नपुंसक (हिजड़ा) बिना किसी वासनामयी इच्छा के आता था। एक दिन जब वह नपुंसक, पैगम्बर साहब की कुछ पत्नियों के पास बैठकर महिलाओ की शारीरिक विशेषताओ के बारे में बता रहा रहा तभी मुहम्मद साहब आ गए और उन्होंने ये सब सुन कर कहा “मुझे नहीं पता था, ये इन बातो को भी जानता है, अतः अब इससे सेवा करवाना वर्जित है।” उन्होंने (आयशा) ने कहा : तब उन्होंने (पैगम्बर) साहब ने उस (नपुंसक) से भी पर्दा (बुरखा) करने का आदेश दिया।
(सही मुस्लिम किताब २६ हदीस ५४१६)

उपरोक्त हदीस से ज्ञात होता है की बुरखा की प्रथा, किसी भी हालत में अवांछित वासनामयी दृष्टि से बचाव हेतु भी नहीं है, क्योंकि एक नपुंसक स्त्रियों के प्रति कैसे वासनामयी हो सकता है ? यहाँ एक बात और ध्यान देने वाली है की बुरखे की शुरुआत मुस्लिम (आज्ञाकारी, ईमानवाला) पुरुष से ही मुस्लिम (आज्ञाकारी, ईमानवाली) महिला को छेड़ छाड़ से बचाने हेतु शुरू की गयी।

आइये अब कुछ आंकड़ो पर नजर डालते हैं, मुस्लिमो का ये दावा भी हवा हवाई है की बुरखे से महिलाये छेड़ छाड़ जैसे उत्पीड़न से बचती हैं क्योंकि गैर इस्लामिक समाज में महिलाये बिना बुरखा स्वतंत्रता से घूमती हैं जिनसे छेड़ छाड़ की घटनाएं इस्लामिक देश के समाज से काफी कम है, उदाहरण के लिए इजिप्ट देश में महिला और युवा लड़कियों को हर २०० मीटर पर ही ७ बार छेड़ छाड़ होने का रिकॉर्ड दर्ज है (Egypt’s NCW chief says women harassed 7 times every 200 meters – GhanaMed, September 6, 2012) (Manar Ammar – Sexual harassment awaits Egyptian girls outside schools – Bikya Masr, September 10, 2012) वहीँ दूसरी और बलात्कार की घटनाओ में सऊदी अरब जहाँ हिजाब को सख्ती से लागू किया गया है, दुनिया में highest rape scales in the world (“The High Rape-Scale in Saudi Arabia”, WomanStats Project (blog), January 16, 2013 (archived).) में शुमार है। यहाँ एक बात आपको और सोचनी चाहिए, वे लोग जो कहते हैं की बुरखे से महिलाओ को छेड़ छाड़ से निजाद मिलती है इसलिए पहनना चाहिए तो जरा इजिप्ट के आंकड़े पर भी नजर डाल ले क्योंकि जो महिलाये छेड़ छाड़ का शिकार हुई वो अधिकांश तौर पर मुस्लिम थी और हिजाब पहने थी (Magdi Abdelhadi – Egypt’s sexual harassment ‘cancer’ – BBC News, July 18, 2008)

अब स्वयं सोचिये क्या बुरखा किसी भी प्रकार से ऐसी विकृत मानसिक लोगो से निजात दिलवा सकता है ? जरुरी है समाज को ऐसे विकृत मानसिक लोगो से निजाद दिलाना, महिलाओ को बुर्के में कैद करना इस समस्या का समाधान नहीं है, क्योंकि महिलाओ को बुरका पहनने से सेहत का खतरा है, देखिये :

हम जानते हैं विटामिन डी मानव स्वास्थ्य के लिए एक आवश्यक पोषक तत्व है जो वसा में घुलनशील विटामिन है, विटामिन डी किसी भी खाद्य पदार्थ में प्राकर्तिक तौर पर नहीं पाया जाता, यह केवल सूर्य की किरणों से त्वचा पर प्रतिक्रिया होने से विटामिन डी का संश्लेषण होता है जो शरीर के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन डी मजबूत हड्डियों के लिए अतयन्तावश्यक है क्योंकि यह आहार में मौजूद कैल्शियम को प्रयोग में लाता है जिससे हड्डिया मजबूत होती हैं, इसकी कमी से “रिकेट” नामक रोग होता है। इस बीमारी में बोन टिशू एक रोग जिसमे बोन टिशू ठीक तरह से मिनरलाइज नहीं हो पाते, जो आगे चलकर हड्डियों को कमजोर तथा हड्डी विकृति जैसी भयंकर स्थिति उत्पन्न कर देता है।

इस रोग के लक्षण अनेको मुस्लिम बहुल देशो में विटामिन डी की कमी के चलते महिलाओ में पाये गए, सऊदी अरब में किंग फहद यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल में की गयी शोध में पाया गया की जो ५२ महिलाओं पर टेस्ट किया गया उनमे सभी महिलाओ में विटामिन डी का स्तर बहुत कम पाया गया जो अनेको गंभीर स्वास्थ्य समस्याए उत्पन्न कर सकता है, जबकि ये एक ऐसा देश है जहाँ सबसे ज्यादा धुप निकलती है पूरी दुनिया के मुकाबले (Elsammak, M.Y., et al., Vitamin D deficiency in Saudi Arabs. Hormone and Metabolic Research, 2010. 42(5): p. 364-368.)

जॉर्डन में किये गए अध्यन के मुताबिक वे महिलाये जो पूरी तरह से इस्लामी वेश भूषा (बुरखा) पहनती थी, 83.3% उनमे विटामिन डी की कमी पायी गयी, ये अध्ययन दोपहर के समय किया गया था। इसमें सबसे चौंकाने वाली बात ये थी की मात्र 18.2% पुरुषो में ही विटामिन डी की कमी पायी गयी, यहाँ ध्यान रहे, पुरुष बुरखा नहीं पहनते (Elsammak, M.Y., et al., Vitamin D deficiency in Saudi Arabs. Hormone and Metabolic Research, 2010. 42(5): p. 364-368.)

एक बात और बताना चाहूंगा की जॉर्डन भी ऐसी ही जगह है जहाँ अरब देश की भांति सूरज की धुप ज्यादा रहती है। तब भी ऐसी स्थिति में केवल महिलाओ में ही विटामिन डी की कमी पाया जाना ये सिद्ध करता है की बुरका प्रथा महिलाओ के स्वास्थ्य हेतु भी खतरनाक है।

अब हम अंत में यही कहेंगे की बुरखा प्रथा न तो खुदाई आदेश है, न ही बुरखा छेड़ छाड़ से ही बचाव करता है, न ही ये महिलाओ की स्वयं की पसंद है, न ही ये महिलाओ के स्वास्थ्य हेतु ही कोई अच्छा कार्य है। अतः मेरी सभी बंधुओ से विनम्र प्रार्थना है, कृपया इन पाखंडो को छोड़ सत्य सनातन वैदिक धर्म की शरण में आओ, जहाँ महिला और पुरुषो दोनों को ही बराबर अधिकार हैं, कोई छुपने छुपाने की वस्तु नहीं, स्त्री जाति हमारा गौरव है।

आओ लौटो वेदो की और

नमस्ते

UN resolution on Kashmir irrelevant

https://thekashmir.wordpress.com/2006/08/28/un-resolution-on-kashmir-irrelevant-kofi-anan-2/

 

 

….UN resolutions on Kashmir did not come under Chapter 7 of the UN charter and were, therefore, not self-enforcing. Unlike the resolutions on East Timor and Iraq, which come under that particular chapter, the Kashmir resolutions require the cooperation of both parties for implementation……[ March 2001  During his brief interaction with the media at Pakistan’s Chakala military ]

kofi-annan.jpg        UN Secretary-General Kofi Annan