कुरान कहता है कि धरती गोल है जबकि वेद कहता है कि धरती चपटी है

Dinesh Sharma

कुछ आक्षेप और उनके जवाब
आपत्ति 1. कुरान कहता है कि धरती गोल है जबकि वेद कहता है कि धरती चपटी है । ( अथर्ववेद १२/१/१७) यजुर्वेद २/१२/१२)

जवाब :- अथर्ववेद का जो प्रमाण संख्या आपने लिखा है उसमे कहीं पर भी ऐसा शब्द नहीं है जिससे पृथ्वी का चपटा होना लिखा हो । और यजुर्वेद का जो आप ने प्रमाण संख्या लिखी है वो संख्या ही गलत है क्योंकि यजुर्वेद अध्याय और मन्त्रो में विभाजित है आपने पता नही कहाँ से ये तुक्का लगा डाला ।
अब हम वेद से ही प्रमाण देते है की वेद के अनुसार पृथ्वी गोल है ।
वेद में जो भी वैज्ञानिक बात कही गई है, वह उदाहरण या उपमा के रूप कही गई है। मुख्य रूप में नहीं कही गई है। उदाहरणार्थ यजुर्वेद के 23 वें अध्याय में यज्ञ का वर्णन करते हुए कहा है- पृच्छामि त्वां परमन्त: पृथिव्या: -मैं पूछता हूँ पृथ्वी का परम छोर क्या है? इसका उत्तर देते हुए कहा गया है “इयं वेदि: परो अन्त: पृथिव्या:”- यह वेदी जहॉं हम यज्ञ कर रहे हैं, पृथ्वी का परला सिरा है।
प्रत्येक गोल वस्तु का आदि तथा अन्त एक ही स्थल होता है,
जो की इस वेद मन्त्र में बताया गया है ।

अब बात कुरआन की करते है ।

” वह है जिसने पृथ्वी को कालीन की तरह बिछाया ” कुरान 20:53

कया इसके बाद भी आपत्ति कर्ता को लज्जा आएगी ?

आपका यह कहना भी बिलकुल तथ्यहीन है की कुरान के अनुसार धरती गोल है इतिहास गवाह है की उमर ने मिश्र का पुस्तकालय तक जलवा दिया था क्योंकि उसमे रखी किताबो के अनुसार पृथ्वी को गोल बताया गया था जबकि उमर कुरआन के आधार पर पृथ्वी को चपटी मानता था ।

आपत्ति 2. :- कुरान कहता है कि धरती चाँद , सूर्य और सब एक एक दायरें में घूम रहें हैं ।
परंतु वेद कहता है कि धरती सिथर है और ( ऋग्वेद २/१२/१२)
और सूर्य पृथ्वी के चारों और चक्कर लगाता है ।( ऋग्वेद १/५०/१)

जवाब :- आपत्ति कर्ता ने जो दो प्रमाण दिए है उनमे ध्रुव शब्द आया है । ध्रुव का अर्थात होता है constant अर्थात जो एक जैसा रहे जिसमे परिवर्तन न हो । पृथ्वी जिस गति में घुमती है वो सदा एक जैसी रहती है पृथ्वी जिस कक्ष में घुमती घुमती है वो सदा एक जैसी रहती है अर्थात वो कभी अपने पथ से विचलित नही होती । जिस नियम व् सिद्धांत से पहले घुमती थी आज भी उसी नियम व् सिद्धांत से घूम रही है उसमे कोई परिवर्तन नहीं हुआ । आपत्तिकर्ता ने सिर्फ अपनी कल्पनाओ के आधार पर ही आक्षेप किया है ।

अब हम कुछ प्रमाण रखना चाहेगे जिस से सिद्ध होता है है की पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और किस कारण परिक्रमा करती है
आयं गौः —– प्रयन्त्सवः ( यजुर्वेद 3/6)
अर्थात :-यह पृथ्वी जल सहित सूर्य के चारो और चक्कर लगाती है ।
आ कृष्णेन ——भुवनानि पश्यन ( यजु 33/43 )
अर्थात :- सविता अर्थात सूर्य जगत का प्रकाशक सब लोको के साथ के आकर्षण में सदैव अपनी धुरी पर घूमता रहता है ।

और पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा किस आधार पर करती है उसका विवरण इस मन्त्र में भली भांति दिया है ।
उक्षा दाधार पृथिवीमुत द्याम ( ऋग्वेद 10/31/8 )

अर्थात :- सूर्य आकर्षण के द्वारा पृथ्वी को धारण करता है ।
क्या इसके बाद भी आपत्तिकर्ता कुछ कहना चाहेगे ?
आइए कुरान के विज्ञानं पर भी कुछ नजर डाले ।
” और सूर्य अपने ठिकाने की तरफ चला जा रहा है ” ( कुरान 36/38 )
अब कोई मुसलमान हमे बतायेगा की सूर्य का ठिकाना कहाँ है ? अर्थात जहाँ वो ठहरता हो ? आपत्ति कर्ता ने तो दावा किया है की कुरान के अनुसार सूर्य अपनी मदार में तैर या घूम रहा है । जो वस्तु अपने कक्ष में निरंतर घूम रही है उसका ठहरने का स्थान कहाँ है जरा इस पर प्रकाश डाले ।

3. कुरान कहता हि सूर्य एक नियम के अनुसार इस ब्रहमाण्ड यात्रा कर रहा है ।
जबकि वेद कहता है कि सूर्य रथ पर सवार होकर पृथ्वी के चक्कर काटता है ।( यजुर्वेद ३३/४३)

जवाब ;- प्रथम तो आपत्तिकर्ता का यह दावा भी निराधार है की कुरआन के अनुसार सूर्य नियम के अनुसार इस ब्रह्माण्ड की यात्रा कर रहा है । जिसका स्पष्ट उत्तर हमने पिछले जवाब में दे दिया है । अब वेद पर उठे आक्षेप को देखते है ।
मन्त्र का सीधा और सरल अर्थ है ” जो सविता अर्थात सूर्य वर्षादि का कर्ता प्रकाशस्वरूप तेजोमयी रमणीय स्वरूप के साथ वर्तमान , सब प्राणी अप्राणीयो में अमृतरूप वृष्टि वा किरण द्वारा अमृत का प्रवेश करा और सब मूर्तिमान द्रव्यों को दिखलाता हुआ सब लोको के साथ आकर्षण गुण से , अपनी परिधि में घूमता रहता है किन्तु किसी लोक के चारो और नहीं घूमता ”

यदि इस सरल और स्पष्ट मन्त्र पर फिर भी आपत्तिकर्ता को कोई आपत्ति है तो कुरआन की इस आयत को पढ लेवे

कुरआन के अनुसार दिन और रात सूर्य के पृथ्वी की परिक्रमा करने के कारण हो रहे है “” मेरा मालिक सूर्य को पूर्व से लाता है तो पश्चिम से ले आ , जो काफिर था हैरान हुआ ” ( कुरान २/२५८ )

आपत्तिकर्ता हमे जवाब दे की क्या सूर्य पूर्व से पश्चिम में जाता है या फिर पृथ्वी के घुमने के कारण हमे ऐसा प्रतीत होता है ?
आपत्तिकर्ता ने वेद के जिस मन्त्र पर आपत्ति की है वहां किसी भी प्रकार से यह अर्थ नहीं निकलता जो आपत्तिकर्ता ने किया है या कहीं से पढ़ा है

आपत्ति 4. कुरान कहता है कि पृथ्वी बगैर किसी सहारे के आसमान में तैर रही है ।
जबकि वेद कहती है कि पृथ्वी कहती है कि पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी है ।

जवाब :- आपत्तिकर्ता ने यहाँ कोई प्रमाण संख्या नहीं दी है मात्र हवा में तीर चलाया है इसलिए हम इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे लेकिन आपत्तिकर्ता का एक भ्रम जरुर दूर करेगे ।

आपत्तिकर्ता ने लिखा है की कुरान के अनुसार पृथ्वी बिना सहारे के तैर रही है जबकि विज्ञानं और वेद कहता है की पृथ्वी गुरुत्व आकर्षण बल के कारण तैर रही है जिसका प्रमाण हमने पिछले जवाबो में दिया है ।

आपत्ति 5. इस्लाम हदीस कहती है कि पृथ्वी पर जब भूकम्प आता जमीन की पिलेट हिलने की वजह से होता है ।
जबकि हिंदू धर्म के अनुसार शेषनाग के करवटें लेने से भूकम्प आता है ।

जवाब :- आपत्ति कर्ता ने यहाँ भी कोई प्रमाण नहीं दिया इसलिए इसपे भी हम कोई टिप्पणी करना वाजिब नही समझते परन्तु एक आयत के माध्यम से आपत्तिकर्ता की आँखे जरुर खोलना चाहते है ।

और हमने धरती पर पहाड़ जमाए ताकि वह हिले डुले नही ” ( कुरान 21/31 )
आपत्तिकर्ता हमे बताये की जब अल्लामियां ने धरती को हिलने से बचाने के लिए पहाड़ जमाए है तो फिर भूकम्प में कैसे हिल डुल जाती है या काँप जाती है ?

आपत्ति 6. कुरान कहता है कि चाँद की अपनी रोशनी नहीं है बल्कि सूर्य से ली गई है ।
जबिक हिंदू धर्म के अनुसार चाँद की अपनी खुद की रोशनी हैं ।

जवाब :- आपत्ति कर्ता ने यहाँ भी कोई प्रमाण नहीं दिया इसलिए इसपे भी हम कोई टिप्पणी करना वाजिब नही समझते परन्तु एक मन्त्र के माध्यम से आपत्तिकर्ता की आँखे जरुर खोलना चाहते है ।

” जैसे यह चन्द्रलोक सूर्य से प्रकाशित होता है वैसे ही पृथ्वियादि लोक भी सूर्य के प्रकाश ही से प्रकाशित होते है ” ( अथर्व १४/१/१ )

आपति 7. कुरान कहता है कि पेड पोधों में जान होती है ।
जबकि दयानंद सरस्वती सत्यार्थ प्रकाश के अनुसार पेड पोधों में जान नहीं होती ।

जवाब :- यहाँ भी आपत्तिकर्ता ने प्रमाण न देकर केवल अपनी मूढ़ बुद्धि का परिचय दिया है ।
देखिये स्वामी दयानंद सरस्वती पेड़ पोधो में जीवन मानते हुए लिखते है ” जो नर शरीर से चोरी , परस्त्रीगमन , श्रेष्ठो को मारने आदि दुष्ट कर्म करता है उस को वृक्षादि स्थावर का जन्म मिलता है ”
आपत्ति 8 . वेद कहता है कि जब सूर्य ॻहण लगता है तो सूर्य को राहु नामक राक्षस निगलता है ।
जबिक इस्लाम कहता है कि सूर्य और चंद्रमा को एक सीध में लाकर ईश्वर अपनी निशानी दिखाता है ।
जवाब :- आपत्ति कर्ता ने यहाँ भी सिर्फ हवा में तीर चलाया है कोई प्रमाण संख्या न देकर ।
इसलिए आपत्तिकर्ता की आपत्ति पर कोई विशेष टिप्पणी करना उचित नही होगा परन्तु आपत्तिकर्ता का ध्यान इस हादिश की तरफ ले जाना चाहेगें
” सूर्यग्रहण एक प्राकृतिक घटना है .जिसका क़यामत से कोई सम्बन्ध नहीं है .लेकिन मुसलमान जिस मुहम्मद को अल्लाह का रसूल और हर विषय का जानकार बताते हैं , वह सूर्यग्रहण के समय डर के मारे कांपने लगता था ,यह बात इस हदीस से पता चलती है ,
“अबू मूसा ने कहा कि जिस दिन भी सूर्यग्रहण होता था , रसूल डर के मारे खड़े होकर कांपने लगते थे .उनको लगता था कि यह कियामत का दिन है , जिसमे कर्मों का हिसाब होने वाला है .फिर रसूल भाग कर मस्जिद में घुस जाते थे , वहां लम्बी लम्बी नमाजें पढ़ते थे और सिजदे करते थे .हमने उनको इतना भयभीत कभी नहीं देखा . शायद वह सूर्यग्रहण को कियामत की निशानी समझते थे . और अल्लाह से अपने गुनाहों को माफ़ करने के लिए इतनी अधिक इबादत किया करते थे .”
सही बुखारी – जिल्द 2 किताब 18 हदीस 167 )

क्या इसके बाद भी आपत्तिकर्ता यह कहने की हिम्मत दिखायेगा की इस्लाम के अनुसार सूर्य और चन्द्रमा के एक सीध में आने से सूर्य ग्राहण होता है ?

आपत्ति 9. कुरान कहता है कि मनुष्य जीवन केवल पृथ्वी पर ही संभव है ।
जबकि दयानंद सरस्वती के सत्यार्थ प्रकाश अनुसार सूर्य पर भी मनुष्य जीवन है ।

जवाब :- आधुनिक विज्ञानं और खोज के आगे अल्लाह और कुरान फेल
होते नजर आ रहे है । क्योंकि विश्व के बड़े बड़े खगोल वैज्ञानिको ने दावा किया है की इस धरती से अलग भी अन्य ग्रहों पर जीवन और जीवो का होना सम्भव है ।
दूसरी बात स्वामी दयानन्द ने यह नही कहा की सूर्य पर भी मनुष्य जीवन है । उन्होंने मनुष्यादि प्रजा कहा है प्रजा से तात्पर्य किसी भी जिव से हो सकता है । और आपत्तिकर्ता ने कैसे दावा कर दिया की सूर्य आदि पर जीवन सम्भव नहीं है ? वैज्ञानिको का मत है की सूर्य पर अग्नि आधारित जीवन सम्भव हो सकता है । जैसे पृथ्वी पर रहने वाले जीवो में पृथ्वी तत्व की अधिकता होने से वे ऐसे ठोस और आकारवाले दिखाई पड़ते है उसी प्रकार सूर्य पर भी अग्नि तत्व की अधिकता के कारण अग्नि स्वभाव और स्वरूप वाले जिव सम्भव हो सकते है । जैसा की वैज्ञानिक स्टीफन हाकिन ने अपने वक्तव्य में कहा था की बृहस्पति आदि ग्रहों पे जिव गैसियस स्टेट में हो सकते है ।तो फिर सुर पर जिव प्लाज्मा स्टेट में क्यों नही हो सकते ?

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2 thoughts on “कुरान कहता है कि धरती गोल है जबकि वेद कहता है कि धरती चपटी है

  1. कुरआन शूरा

    अत तकवीर आयत 11:
    और जब आसमान का पर्दा हटा दिया जायगा ।

    इस आयत का सही तर्जुमा इब्ने कसीर और मोलाना मोदूदी रह0 सही किया है ।

    सही ✅ अर्थ यह है कि आसमान का पर्दा हट जायगा ।

    भावार्थ :- यह है कि जो हमारी निगाहों से ओझल है सब प्रकट हो जायगा।
    अब तो सिर्फ शुन्य ही नजर आता है या फिर बादल ☁ धूल चांद, सूर्य ☀ और तारे ✨ लेकिन उस वक्त ईश्वर की खुदाई अपनी असल शक्ल सच्चाई के साथ सबके सामने प्रकट हो जायगी ।

    आज विज्ञान भी मानता है कि सूर्य चंद्रमा ,✨ तारे सब खत्म हो जायगें ।

    • आसमान का पर्दा : आसमान का पर्दा है ही नहीं , इसलिए पर्दे की बात झूठ है .
      खुदाई अपनी असल शक्ल सच्चाई के साथ सबके सामने प्रकट हो जायगी : ऐसा बहुरूपिया अल्लाह तुम्ही को मुबारक

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