पण्डित कौन‬?

ओ३म्।।
‪#‎पण्डित_कौन‬? https://www.facebook.com/vedprakash.yadav.3914/posts/713369775468456

तदस्य सजातं तारिकादिभ्य इतच्।
पण्डा सदसद्विवेकिनी बुद्धिः। सा जाताSस्येति पण्डितः इतच् प्रत्ययः।।
अष्टा०५/२/३६

अर्थ- सत्य और असत्य का निर्णय करने वाली बुद्धि का जो स्वामी हो, उसका नाम पण्डित है ।

विद्वान् विपश्चिद दोषञ्ज संसुधिः कोविदो बुधः।
धीरो मनीषी ज्ञः प्राज्ञःसंख्यावांपण्डितः कविः ।।

अर्थ — विद्वान् , विपशिचत, दोषज्ञ (दोषों को जानने वाला) सन (साधु) , सुधी, कोविद (वेदों को जानने वाला), बुध , धीर, मनीषी, ज्ञ , प्राज्ञ, संख्यावान (विचारशील) और कवि पण्डित कहलाता है ।
अमर कोश : २/७/५

मातृवत्परदारेषु परदृव्येषु लोष्ठवत। आत्मवत्सर्वभूतेषु यः स् पण्डितः।।

अर्थ// जो परस्त्री को माता के समान, पर धन को मिटटी के ढेले के समान, और सब प्राणियों की आत्मा को अपनी आत्मा के समान देखता है , वह पण्डित है ।
श्रीमद भगवत गीता ५/१८

उपरोक्त योग्यताएं रखने वाला पण्डित कहलाने का अधिकारी होता है …जिस तरह यदि आपने दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की हो तो आपको कोई स्नातक नही कहता उसी तरह उपर्युक्त योग्यताएं नही रखने वाला पण्डित नही कहला सकता । इति सिद्धम ।।

‪#‎इदन्नमम्‬

पुस्तक साभार -/पौराणिक पोप पर वैदिक तोप
लेखन–महामनीषी पण्डित मनसाराम जी “वैदिक तोप ”

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