स्वामी श्रद्धानंद 1

Ashish Singh Chauhan
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स्वामी श्रद्धानंद होने का मतलब क्या है ?

१- स्वामीजी ने अछूतों और छोटी जाति वालों को सबसे
पहले ‘दलित’ कहकर पुकारा, जितना कार्य अकेले स्वामीजी
ने अंग्रेज भारत के इतिहास में दलित-उत्थान के लिये किया
उतना किसी अन्य व्यक्ति ने नही किया | स्वामीजी ने इस
सुधार को अपने घर में लागू किया और अपनी बड़ी बेटी का
विवाह एक दलित युवक डॉ.सुखदेव के साथ किया, जिसे
उन्होंने ही पढाया था | इसके कारण स्वामीजी को जाति और
समाज से सामूहिक बहिष्कार किया गया, (स्वामीजी जन्म
से क्षत्रिय थे) जब स्वामीजी के सामने मौलाना मुहम्मद अली
की अध्यक्षता में कांग्रेस के नेताओं ने ये प्रस्ताव रखा कि
भारत के ८ करोड़ दलितों और अछूतों को हिन्दू और मुस्लिमों
में बराबर बाँट दिया जाये तो स्वामीजी ने ललकार कर कहा
“किसी की हिम्मत नही है जो ऐसा कर सके, मैं अपने जिगर
के टुकड़े दलितों को मुसलमानों के हाँथ नही पड़ने दूंगा |”
दलितों के अधिकारों के लिये स्वामीजी ने कश्मीर से केरल
तक सत्याग्रह किये और बहिष्कार सहे, लाठियां खायी पर
अफ़सोस आज एक तथाकथित दलित विचारक और नेता
उनका नाम नही लेता ?

२- जब उनकी बेटी एक मिशन स्कूल से पढ़कर आई और
आकर ये कविता सुनाई “ईसा मेरा राम रम्मैया, ईसा मेरा
कृष्ण कन्हैया” तो स्वामीजी स्तब्ध रह गये, उन्होंने उसी
समय अपने बहनोई लाला देवराज के साथ मिलकर स्त्री
शिक्षा के लिए पाठशाला खोलने का निर्णय किया, और
इस प्रकार उत्तर-भारत की पहली कन्या पाठशाला जालंधर
में खोली गयी, जिसका पौराणिक मंडली ने जबरदस्त विरोध
किया था |

३- जब मौलाना हसन निजामी ने एक किताब छापकर
मुसलमानों को बताया कि किस प्रकार हिन्दुओं और गैर-
मुस्लिमों को मुसलमान बनाया जाये तो स्वामीजी इसका
प्रतिउत्तर छपवाकर हिन्दू समाज को सजग किया, और इसी
के साथ ‘भारतीय शुद्धि सभा’ की स्थापना कर दी | शुद्धि
के जबरदस्त प्रभाव से मुस्लिम नेताओं और कांग्रेस में
हडकंप मच गया, कांग्रेस के नेताओ ने स्वामीजी को कहा
कि आप शुद्धि का कार्य बंद कर दीजिये, इसपर स्वामीजी
ने कहा “यदि आप लोग इसके बदले में समस्त इस्लामिक
प्रचारकों को गैर-मुस्लिम को मुस्लिम बनाने से रोक दें तो
मैं तत्काल शुद्धि बंद कर दूंगा | पर न कांग्रेस और मुस्लिम
समाज की तरफ से ऐसा कोई आश्वासन दिया गया |

स्वामीजी ने सुधार कार्यों को अपने घर से लागू किया, अपनी
पत्नी को पर्दा नही कराया, अपने बेटे की शादी खोजकर एक
विधवा से की | स्त्री-शिक्षा के पहले कदम के रूप में अपनी
पत्नी को शिक्षित किया | क्या आधुनिक भारत के इतिहास ने
कभी ऐसे महामानव को मोल किया है ?

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