O Convert, Welcome to the Vedic Dharma

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3 thoughts on “O Convert, Welcome to the Vedic Dharma

  1. जैसा कि यह ज्ञात है कि वेद पहले विशाल थे, बड़े थे – वेदव्यास जी ने वेद को चार हिस्सों में बाँट दिया – ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद

    वेदव्यास जी का समय था द्वापर-युग में (महाभारत, गीता काल में)
    महाभारत कितनी पुरानी मानी जाती है – आज से करीब 5100 वर्ष पूर्व
    इसका मतलब चार वेदों (ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद और अथर्ववेद) का जिक्र महाभारत में हो सकता है, गीता में हो सकता है, पुराणों में हो सकता है, क्यूंकि ये सब वेदव्यास ने लिखे – किन्तु रामायण में नहीं होना चाहिए, अष्टावक्र-गीता में भी नहीं होना चाहिए।

    द्वापरयुग की समाप्ति के समय व्यास ने वेद का चार भागों में विभाजन कर दिया जिससे कि कम बुद्धि एवं कम स्मरणशक्ति रखने वाले भी वेदों का अध्ययन कर सकें। व्यास जी ने उनका नाम रखा – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। वेदों का विभाजन करने के कारण ही व्यास जी वेद व्यास के नाम से विख्यात हुये। ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद को क्रमशः अपने शिष्य पैल, जैमिन, वैशम्पायन और सुमन्तुमुनि को पढ़ाया।

    अब इसी बात को जारी रखते हुए मैं आपका ध्यान वाल्मीकि-रामायण में किष्किंधाकांड के सर्ग 3, श्लोक 28 की तरफ आकर्षित करना चाहता हूँ, जो इस प्रकार है –

    न अन् ऋग्वेद विनीतस्य न अ\-\-यजुर्वेद धारिणः |
    न अ\-\-साम वेद विदुषः शक्यम् एवम् विभाषितुम् || ४-३-२८

    अर्थ : जिसे ऋग्वेद की शिक्षा नहीं मिली, जिसने यजुर्वेद का अभ्यास नहीं किया तथा जो सामवेद का विद्वान नहीं है, वह इस प्रकार सुन्दर भाषा में वार्तालाप नहीं कर सकता.

    अब उपरोक्त श्लोक विचारणीय है कि रामायण 8-10 लाख वर्ष पूर्व (त्रेतायुग) की मानी जाती है और वेदों को चार हिस्सों में बांटने वाले वेदव्यास हुए आज से करीब 5100 वर्ष पूर्व (द्वापरयुग में) ।

    क्या वाल्मीकि-रामायण में ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद का उल्लेख आना कुछ अजीब सा नहीं लगता?

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