दीन वालों के द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर

दीन वालों के द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर :- 

१. तुम गाय को माता कहते हो तो ये सिर्फ भारत के हिंदूओं की माता है या पूरे विश्व के हिन्दुओं की क्यों के भारत के सिवा पूरे विश्व में गौ-मांस खाया जाता है तो विदेशो में रहने वाले हिन्दू इसका क्यों विरोध नहीं करते है ??? विदेशो में डर लगता है या तुम बस घर के शेर हो ?? 

उत्तर :- बाकी के देशों में गाय पालन भैंसों से अधिक होता है ७०% पशु वहाँ गाय हैं जहाँ उनके दूध के पदार्थ बिकते हैं । और इससे गाय की महत्ता के बारे पता चलता है । पर अब उन देशों को भी ज्ञात होने लगा है कि इस पशु की हत्या करना ही green house effect को आमंत्रण देता है । हम वहाँ विरोध इस कारण नहीं करते क्योंकि पहले अपना घर देखना है फिर बेगाना ।

२. अगर हिन्दू धर्म 5 हज़ार साल पुराना है तो फिर भारत के बाहर इसका प्रसार क्यों नहीं हुआ ? और एक बाहरी अरबी धर्म को इतनी मान्यता कैसे हासिल हुई , के वो आपके अपने पुरातन धर्म से ज्यदा अनुयायी कैसे बना सका ???? 

उत्तर :- वैदिक धर्म आदि काल से है इसके प्रमाण बहुत से इतिहास वेताओं ने दिये हैं । ऋग्वेद को प्रचीन पुस्तक माना गया है । अब प्रसार की बात है वो यह कि वैदिक धर्म जो है वो लोकतंत्र में यकीन रखता है । कोई भी मनुष्य नैतिक मूल्यों का पालन अपनी शिक्षा के अनुसार करने को स्वतंत्र है । कोई बाधा नहीं है पर हाँ शिक्षा पर अवश्य ही ज़ोर दिया गया है । उसके उपरांत मानव चाहे शिक्षा को सार्थक करे या न करे वो उस पर है ।
इसी कारण यह धर्म मानवों पर थोपा नहीं गया है । तो यह बढ़ने के स्थान पर सिमटा है । पर जो मान्सिक शांतीकी तालाश में हैं वे आज भी भारतीय दर्शन की ओर ही आते हैं । अब जहाँ अरब की मानसिक्ता है वह किसी दूसरे को सहन गहीं करती है । सदा ही मनुष्यों का दमन करके ही अरब का सामराज्य फैला है । और यह कोई धर्म नहीं है यह तो मुहम्मद और उसके अनुयायईयों के द्वारा मक्का मदीना समेत कई अरबी राज्य हथियाने के तहत एक मत खड़ा किया गया था जिसका उद्देश्य लोगों की सम्पत्तहयाँ और स्त्रीयाँ लूटना था ।
तो ऐसे लालचों के कारन लोगों को ईस्लाम में शामिल करना कोई कठिन नहीं है । वैदिक धर्म में जहाँ पल पल मर्यादाओं की परीक्षा देनी पड़ती है । वहीं पर ईस्लाम सैक्स और विलासीनता का मत है और कुछ नहीं ।
इसी कारण ईस्लाम को सफलता मिली परंतु यह ज्यादा देर के लिये नहीं है क्योंकि हमने ेखा जहाँ ईस्लाम गया वहीं मानवता का कत्ल हुआ देश मिट गये । बर्बाद हो गये । 

३. अगर हिन्दू धर्म के अनुसार एक जीवित पत्नी के रहते दूसरा विवाह अनुचित है तो फिर राम के पिता दशरथ ने चार विवाह किस नीति अनुसार किये थे ?? .

उत्तर :- प्रथम तो राम ने स्वयं मर्यादा का पालन कर एक विवाह किया था । पर दशरथ ने तीन विवाह कर मर्यादा का उलंघन । क्योंकि समाज में कुछ अराजक तत्व होते हैं जो कि ऐसे कार्यों से वैदिक गरिमा को चोटिल करते हैं । तो इससे वैदिक संस्कृति का दोष न कह कर मानवी दोष ही कहा जायेगा ।अगर आप फिर भी दशरथ को लेकर वैदिक संस्कृति पर आघात करते हो तो फिर राम को लेकर निश्चय ही आपको वैदिक संसकारों की प्रशंसा भी करनी होगी ,ये एक तरफा खेल न चलेगा ।

४. अगर भूलवश शिव ने अपने पुत्र गनेश की गर्दन शिव ने काट दी तो फिर ये कैसे भगवान् है जो फिर उस कटी गर्दन को उसी जगह पर क्यों नहीं जोड़ सका , क्यों एक निरीह जानवर ( हाथी ) हत्या करके उसकी गर्दन गणेश की धढ पर लगाई .. एक इंसान के बच्चे के धढ़ पर हाथी की गर्दन कैसे फिट आ गयी ? ? 

उत्तर :- प्रथम तो यह कि शिव नाम का कोई इतिहास पुरुष है वह ईश्वर नहीं है । और गणेश जो कि हाथी के मुँह वाला देव है वह मिथ्या है । काल्पनिक है । शिव पुराण कोई वैदिक और प्रमाणिक ग्रंथ नहीं है । केवल वेद और वेदों के अनुकूल ग्रंथ ही मानने योग्य हैं ।

५. अगर हिन्दू धर्म में मांसाहार वर्जित है तो फिर राम स्वर्ण मृग को मारने क्यों गए थे ? क्या मृग हत्या जीव हत्या नहीं है ? जवाब दो 

उत्तर :- राम ने किसी मृग का शिकार नहीं किया बाज़ार में १० प्रकार की रामायणें हैं । आप केवल वाल्मिकी रामायण ही पढ़ें तो वहाँ ऐसे कर्मकांडों का नामो निशान भी न मिलेगा । जैसे हनुमान का बंदर होना, हवा में उड़ना, पहाड़ उठाना , सुग्रीव का रिच्छ होना आदि जैसी झूठी बातें नहीं मिलेंगी । 

६. राम अगर भगवान् है तो फिर उसको ये क्यों नहीं पता था क रावण की नाभि में अमृत है अगर उसको घर का भेदी न बताता के रावण की नाभि में अमृत है तो उस युद्ध में रावण कभी नहीं मारा जाता . क्या भगवन ऐसे होते हैं ?? 

उत्तर :- राम भगवान नहीं केवल अयोध्या ( कोशल ) का राजा था । न ही रावण की नाभी में अमृत ऐसी झूठी बातें तुलसी रामायण में मिलेंगी । वाल्मिकी रामायण में नहीं हैं । भगवान निपकार होते हैं जो सर्वव्यापक है । शरीर वाला कभी भगवान नहीं हो सकता ।

७. तुम कहते हो के कृषण तुम्हारे भगवन हैं तो क्या नहाती हुई निर्वस्त्र स्त्रियों को छुपकर देखने वाला व्यक्ति भगवान् हो सकता है भगवान् को तो चरित्रवान होना चाहिए जिसके मन में स्त्री देह की लालसा है ऐसा व्यक्ति कैसे भगवान् हो सकता है अगर ऐसा काम कोई व्यक्ति आज के दौर में करे तो हम उसे छिछोरा कहते हैं …. आप भगवान् क्यों कहते हैं ??? 

उत्तर:- कृष्ण कोई भगवान नहीं है । वो एक योगी पुरुष थे द्वारका के राजा जो सौराष्ट्र ( गुजरात ) के राजा थे ।
न तो वे नहाती हुई औरतों को देखते थे , न कपड़े ले भागते थे । यह सब । भागवत की लीला है । भागवत में कृष्ण को कलंकित किया गया है । उसका चरित्र देखना हो तो देखें वेदव्यास कृत महाभारत में । या पंडित चमूपति जी कि पुस्तक योगेश्वर कृष्ण पढ़ें जो कि आर्य समाज मंदिर से प्राप्त कर सकते हैं । पर आपको कृष्ण के चरित्र की चिंता क्यों हुई है ? ईस्लाम में तो चरित्रहीनता भी जायज़ है । मुहम्मद को देखें तो उसने औरतें ईकट्ठा करने के इलावा ज़िन्दगी में कुछ नहीं किया । २५ साल की उमर में अपनी माँ की उमर ४० साल की खुदीजा बेगम को बीवी बनाना क्या चरित्र था ? अपने मूँह बोले बेटे जैद की बीवी जैनब को उससे तलाक दिलवाकर क्या निकाह लेना उसकपउँचे चरित्र का परिणाम था ? साफिया, रेहाना , मारिया जैसी यहूदी और ईसाई रखैलों को रखना क्या ऊँचा चरित्र था ? ५३ साल की पक्की उमर में अपनी पोती की उमर की ६ साल की आयशा से शादी करना क्या उसकी ऊँचे चरित्र की पहचान थी ? पंजाबी में कहावत है मियाँ :- ” साडा कुत्ता, कुत्ता ए ते तुहाडा कुत्ता टौम्मी ” । वही तुम्हारी बात है । 

८. क्या हिन्दू धर्म में स्त्री को जुए में दांव पर लगाने का प्रावधान है अगर नहीं तो फिर जो खुद को धर्मराज कहता है उसने द्रोपदी को क्यों दांव पर लगा दिया ??? 

उत्तर :- युधिष्ठिर की इस करतूत पर स्वयं इतिहास ने हाय तौबा मचाई है । यह गलत था कि अपनी स्त्री को दांव पर लगाया गया । परंतु यह इतिहास की घटना है जैसा कि कहा गया युधिष्ठिर हमारे वैदिक धर्म का प्रतीनिधित्व नहीं करता । ऐसे में तो कृष्ण ने द्रौपदी की लाज बचाई उसको क्या कहोगे ? उसे नहीं सराहोगे क्या? दूसरी ओर वहाँ अपबों में आज भी ये प्रथा है रखेलों को रखने की ,क्या वो उचित है ? मुहम्मद की बनाई रवायतों का शिकार बहुत सी बच्चियाँ हो रही हैं , जिनसे अधेड़ उमर के मर्द शादीयाँ कर रहे हैं , क्या ये जायज़ है ? 

९. शिव के लिंग (पेनिस ) की पूजा क्यों करते हैं ? क्या उनके शारीर में कोई और चीज़ पूजा के काबिल नहीं ?? 

उत्तर :- प्रथम यह जानो कि जो शिव तुम बता रहे हो वो इतिहास पुरूष है जो कि आर्यवर्त का राजा था और कैलाश मान सरोवर का वासी था । उसके लिंग पूजा की रवायत वाममार्गियों ने की है जो कि मिथ्या व्याभिचार है । हाँ यह गलत है , सरासर गलत जो लोग यह करते हैं जब तक उनको नहीं पता तब तक वो करते हैं । पर जब समझते हैं तब वे छोड़ देते हैं । पर मज़ाक उड़ाने कबजाये उनको समझाना अच्छा है । 
अब यहाँ मक्का के संगे अस्वद की उदहारण लें तो उसको दुनिया भर के मुसलमान चूमते हैं जो की वाममार्गीयों से भी अधिक गंगदा कार्य है । लोगों की थूकें और जूठें उन पर लगती हैं । पता नहीं बदबुदार मुँह वाे लोग कितना वाहियात कार्य करते हैं मियाँ इसको बुरा नहीं कहोगे ? अपना दोष कोई नहीं देखता दूसरों पर उंगली उठाना बहुत आसान काम है । पर जब कोई आपको आईना दिखाये तो आप गालियाँ देते हो । 
लिंग पूजने से भी बुरा लिंग चूमना हुआ कि नहीं ?

१० . खुजराहो के मंदिरों में काम- क्रीड़ा में लिप्त , उत्तेजक मुद्रा में मूर्तियाँ हैं फिर ऐसे स्थान को मंदिर क्यों कहा जाता है . क्या काम – क्रीडा हिन्दू धर्मानुसार पूजनीय है ??? 

उत्तर :- सैक्स ऐसा विषय है जिसे सिखाना नहीं पड़ता । प्रकृति सिखाती है । इसको पूजना है ऐसा हमारे धर्म में कहीं नहीं परंतु उल्टा ब्रह्मचर्य की शिक्षा ही पाओगे । जो खजुराहो की बात है वो मंदिर किसी राजा के द्वारा मालूम होता है कि काम की शिक्षा देने को बनवाया था । जिससे कि राजाओं को उत्तेजना हो जब वे गृहस्ती हों 
और संतान उत्पत्ति की क्रिया सीखें ।

११ . हिन्दू धर्म की पुस्तकों के अनुसार पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी हुई है, क्या कोई व्यक्ति इस बात पर विशवास कर सकता है ??

उत्तर :- तुमको पहले ही कहा है कि वैदिक ग्रंथ ही मानने योग्य हैं । ये जो तुम लाये हो वो विष्णु पुराण का है , किसी प्रमाणिक ग्रंथ का नहीं है । ऋग्वेद का प्रथम मण्डल पढ़ो तो पता चलेगा कि पृथिवी सूर्य्य की परीक्रमा करती है । और चन्द्रमा पृथिवी की । यह सौर मण्डल आकाश गंगा के मध्य की परिक्रमा करता है ।

https://www.facebook.com/Truth.Alone.Wins/posts/212746612235047

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4 thoughts on “दीन वालों के द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर

  1. Jab bhi tumhare dhrm ki sacchayi saamne aati hai tab tum ye kah dete ho ki hum ye nahi maantey. Tumne toh khud ke hi devi devtaao ko jhutla diya hai Chalo tumne kuch toh sacchayi likhi. Tumne ishwar ko niraakar kahaa ye baat acchi lagi ishwar sharir wala nahi ho sakta 100% true Chalo Islam ka kuch effect toh hua tum logo pr ab murti pooja krna bhi chhor do yr

    • Arya log rishi dayanand dwara bataye ved bhashya se prerit ho kar chalte hain. Islam se nahin. Jis prophet abraham ke dharm ko isai-islam wale mante hain wo vastav mein Rishi Brahm hi hain jinhone sarv pratham 4 ved siddha/kanthastha kar ke ved-mat ka pratipadan kiya. Isliye sab logon ko [ekmatr eeshwar] AUM dwara diya gaya [ekmatr eeshwareeya gyan] ved, joki shruti evam lipi ki shaql mein mil raha hai , usko janna chahiye. Avataar aur pygamber sarv-vyapt eeshwar ka karya nahin ho sakta. Gulaam pratha eeshwareeya nahin hai. Doosron ki striyon ka balat upbhog karne ki agya eeshwar ya uska saccha banda nahin de sakta. Nirapradh janwaron ko maar ke khaane ki agya eeshwar nahin de sakta. Bahu patniwad ka aadesh eeshwareeya nahin ho sakta. Vaidik Karmana-varna-ashram-dharm vyawastha hi sansaar mein sthayi shanti la sakti hai. Arya log murti poojak nahin hain aur ve vyartha ki kaaba-amarnath aadi teertha yatra bhi nahin karte.

    • भैया ५७० में आपका इस्लाम आया तो क्या उसके पहले आपके अल्लाह नहीं थे और जिसे आप मुहम्मद साहब कहते है तो उनका इतिहास आप खुद पढ़ लीजिये शायद आपके सारे सवालों के जवाब मिल जाएँ क्योकि धर्म के नाम पर मौज करना वहीँ से शुरू हुआ है ……और मुझे अल्लाह या भगवन सब एक ही है ….बस ये कहना चाहता हु की किसी ऐसे व्यक्ति के कारन जो की ६ साल की बच्ची से भी निकाह कर ले ,,अल्लाह को बदनाम न करें

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