Mulla Naseeruddin -nigrah sthan -II

The Light Of Truth-सत्यार्थ प्रकाश · 5,885 like this 9 hours ago ·

सुशील आर्यवीर भाई और मिया मुशफिक के बीच शाश्त्रार्थ मे मिया मुशफिक से उत्तर देते ही नहीं बना और वो बीच मे ही गायब हो गए , जाने सूरज ने अपने साथ कीचड़ मे डुबो दिया या फिर प्रथ्वी नाम की चटाई ने इनको लपेट लिया ….आइये मित्रोँ आपको कुरआन से एक ऐसी बात बतायेँगे जो हैरान करने वाली और आलिमोँ के सामने चुनौती वाली है, और हम चुनौती देते हैँ इस्लाम जगत को कि वो इसका उत्तर दे,

सुशील आर्यवीर जी का प्रश्न मुशफिक से—- कि कुरआन शरीफ़ सूरा अल हाक़्क़ा,आयत 14, और धरती और पहाड़ उठा कर चूर्ण विचूर्ण कर दिये जायेँगे एक ही बार मेँ। आगे आयत नम्बर 16 और आकाश फट जावेगा और उस दिन उसके बंधन ढीले पड़ चुके होँगे। आर्योँ ये तो कुरआन मेँ कियामत का बयान है कि कियामत के दिन अल्लाह ऐसा करेँगे अर्थात् धरती और आकाश को खत्म कर देँगे, पर देखो सूरा हूद आयत नम्बर 107 और 108, कुरआन फ़रमाती है वे सदैव उसी मेँ रहेँगे जब तक आकाश और धरती स्थिर है। यहाँ दोजख की बात हो रही है जो इसके ऊपर की आयतोँ को पढ़ने से मालूम हो जायेगा, आगे जन्नत के बारे मेँ सुनो- और रहे वे लोग जो भाग्यवान होँगे तो वे जन्नत मेँ होँगे जहाँ वे सदैव रहेँगे जब तक कि आकाश और धरती स्थिर है। अब आलिमोँ ये बताओ जब कियामत मेँ धरती और आकाश का वजूद खत्म हो जायेगा तब ये धरती और आकाश कौन से होँगे जो जन्नत और दोजख की स्थिरता का कारण बनेँगे? और जन्नत दोजख तो सदैव रहने वाली है क्या धरती और आकाश भी सदैव रहेँगे? अगर सदैव रहेँगे तो फिर हम धरती को चूर्ण और आकाश को फाड़ देगे पिघली धातु का करेँगे, कैसे सम्भव है? —

मुशफिक का उत्तर—– यह तो ‘खोदा पहाड़ निकला चूहा’ वाली बात हो गई। च्नौती का शब्द देख के तो मुझे लगा कि कोई कठिन प्रश्न होगा जिसका उत्तर ढूंढने में मुझे समय लगेगा। पर चुनौती भरा प्रश्न देख कर पता चला कि इसका उत्तर तो स्वयं कुरआन ने दिया हुआ है। लगता है सवाल करने वाले ने पूरे कुरआन का अध्ययन नहीं किया। सोचा होगा बड़ा तीर मारा है सवाल पूछके। याद रहे कि ये उसी स्वामी के अनुयायी हें जिसने आज आपने जमाने में कुरआन पर आक्षेप करते हुए पूछा था “यदि लोहे या पत्थरों की नौका बनाकर समुद्र में छलावे तो खुदा की निशानी डूब जाए या नहीं?” [सत्यार्थ प्रकाश समुल्लास 14, नंबर 124] स्वामी जी आज ज़िंदा होते तो लोहे की नौका को समुद्र में चलता देखते। पर आज तक इनके अनुयायियों ने अपना सबक नहीं सीखा। आर्य बंधु ने पूछा “जब कियामत मेँ धरती और आकाश का वजूद खत्म हो जायेगा तब ये धरती और आकाश कौन से होँगे जो जन्नत और दोजख की स्थिरता का कारण बनेँगे?” कुरआन अवश्य कहता है कि यह धरती और आकाश खतम हो जाएंगे पर साथ ही कुछ और भी कहता है। ज़रा ध्यान से सुनिए يَوْمَ تُبَدَّلُ الْأَرْضُ غَيْرَ الْأَرْضِ وَالسَّمَاوَاتُ ۖ وَبَرَزُوا لِلَّهِ الْوَاحِدِ الْقَهَّارِ “उस दिन यह धरती दूसरी धरती से बदल दी जाएगी और आकाश भी। और वे सब के सब अल्लाह के सामने खुलकर आ जाएँगे, जो अकेला है, सबपर जिसका आधिपत्य है” [सूरह इब्राहीम 14: आयत 48] कुरआन मजीद कितनी अजीब किताब है कि 1400 वर्ष बाद पूछे जाने वाले सवाल का जवाब इस में पहले से दिया हुआ है। यह धरती और आकाश एक नए धरती और आकाश में परिवर्तित होगी जिसकी अपनी अलग शान होगी अपने अलग प्रकृतिक नियम होने और न जाने क्या। तो कुरआन की दो आयात में कोई विरोधाभास नहीं। काश ये लोग कुरआन को ध्यान से पढ़ते जैसा कि कुरआन स्वयं बयान करता है أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ الْقُرْآنَ أَمْ عَلَىٰ قُلُوبٍ أَقْفَالُهَا “तो क्या वे क़ुरआन में सोच-विचार नहीं करते या उनके दिलों पर ताले लगे हैं?” [सूरह मुहम्मद 47: आयत 24]

सुशील जी का पुनः प्रश्न मुशफिक के उत्तर पर —- मुश्फिक भाई उत्तर देने के लिए धन्यवाद।कुछ लोगोँ को लगा होगा भई बड़ा जबरदस्त उत्तर दिया आपने, आइये देखते हैँ, आपने कहा खोदा पहाड़ निकली चुहिया, मैने क्या कहा था कि शेर निकलेगा, खैर कुछ न कुछ तो आपके हाथ लगा चुहिया ही सही, आगे आपने कहा आपने ध्यान से नहीँ पढ़ा, भई पढ़ा और ये बात भी मालूम है कि कुरान सृष्टि का निर्माण दोबारा करेगा, देखो कुरआन सूरा अल अंबिया, आयत 104, वह दिन जबकि हम आकाश को लपेट लेँगे( ये अलग बात है कि अल्लाह और मुहम्मद को ये मालुम न था कि आकाश किसे कहते हैँ) जैसे पंजी मेँ पन्नोँ को लपेट दिया जाता है। जिस तरह हमने प्रथम रचना का आरम्भ किया था, उसी तरह हम फिर उसकी पुरनरावृत्ति करेँगे, यह हमारे जिम्मेँ एक वादा है। निश्चय ही हमेँ यह करना है। आपने जो आयत दी कि आकाश और धरती बदल दी जायेगी उस आयत के मुकाबिल ये आयत ज्यादा ठीक है, जो कि आपकी आयत को पूरा पूरा एक्सपलेन करती है, मुश्फिक आर्योँ का तर्क इतना कमजोर नहीँ जितना आप समझते हैँ, हम दार्शनिक बात करते हैँ और इस्लाम वालोँ का दार्शनिकता से कोई लेना देना नहीँ, और जो आयत आपने और मैँने दी ही उससे तो इस्लाम का अकीदा ही नेस्तेनाबुद हो जाता है, क्योँकि इस्लाम मानता हैँ कि सृष्टि दोबारा नहीँ बनेगी, लोगोँ का पुनर्जन्म नहीँ होगा, क्योँकि दार्शनिक भाषा मेँ पुनरजन्म का नाम ही पुनरावृत्ति है, आप बतायेँ क्या ये जो सृष्टि दोबारा बनेगा उसका कभी विनाश नहीँ होगा, क्योँकि जन्नत और दोजख तो सदैव रहने वाली है, और अगर विनाश नहीँ होगा तो आयत मेँ ये क्योँ कहा गया कि जब तक आकाश और धरती स्थिर हैँ, भई अगर स्थिर हैँ तो कब तक क्योँकि स्थिरता का कहना ही दर्शा रहा है कि इनका भी विनाश होगा, और जब इनका विनाश होगा तो दोजख जन्नत सदैव रहने वाली कैसे? अल्लाह का कोई काम निष्प्रयोजन नहीँ होता, जब आकाश और धरती को दोबारा बनायेगा तो किस प्रयोजन के लिए? क्या फिर से धरती पर मखलूक होगी? अगर नहीँ तो प्रयोजन बताईये? खैर कुरान ने तो बता दिया दोबार पुनरावृत्ति करेँगे इसका मतलब वो फिर से वैसा ही सामान और मखलूक बनायेँगे। आप दयानन्द जी को बीच मेँ लायेँ उस पर भी आपको बता दूँ किश्ती का दर्या पर चलना खुदा कि निआमत बताना मूर्खता है, क्योँकि अगर किश्ती डूब जायेँ लकड़ी की भी ड़ूबती है तो क्या अल्लाह की निआमत और निशानियाँ डूब जायेगी? ट, और लोहे की या पत्थर की हो तो, तो भाई अगर लोहे की भी अक्ल लगा के न बनाई जाये तो वो भी डूब जायेगी, अब अगर मानवोँ नेँ लोहे की नौका भी चला ली और कुछ दिन बाद पत्थर की भी अपनी अक्ल लगाकर चलाने लगे तो इसमेँ ऋषि पर आक्षेप कैसा? ऋषि ने तो लिख दिया नौका मनुष्य और क्रिया कौशलादि से चलती है। इसमेँ आपके खुदा की नेअमत औ निशानी कैसे? पहले आक्षेप करना का मकसद तो समझो। आपने कहा- काश ये लोग कुरआन को ध्यान से पढ़ते जैसा कि कुरआन स्वयं बयान करता है أَفَلَا يَتَدَبَّرُونَ الْقُرْآنَ أَمْ عَلَىٰ قُلُوبٍ أَقْفَالُهَا “तो क्या वे क़ुरआन में सोच-विचार नहीं करते या उनके दिलों पर ताले लगे हैं?” [सूरह मुहम्मद 47: आयत 24] बताओ तो ये ताले लगाये किसने आपकी कुरआन फरमाती है कि अल्लाह ने इनके कानो और दिलोँ मे ठप्पा लगा दिया है, उनके दिलोँ मेँ एक रोग था और हमने रोग को और बढ़ा दिया, यही नहीँ क्या तुमने देखा नहीँ कि हमने इन काफीरोँ पर शैतानोँ को छोड़ रखा है जो इन्हेँ उकसाते रहते हैँ( सूरा मरयम,आयत 83) तो मुश्फिक अपने अल्लाह को कोशो हमेँ नहीँ, क्योँकि ठप्पा वही लगाते, रोग वही बढ़ाते और वही उकसवाते रहते हैँ। हाँ आज अगर मुहम्मद होते तो हम जरुर पूछते सगे भाई बहन का मुबाशरत जायज है या नाजायज???????

https://www.facebook.com/sushil.aryaveer?fref=ts

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