क्या मतंग शूद्र से ऋषि बने थे ?

स्वामी दयानंद द्वारा सत्यार्थ प्रकाश में गैर ब्राह्मण से ब्राह्मण बनने के अनेक  उदाहरण चतुर्थ समुल्लास में दिए गए हैं.

हमारे कुछ मुस्लिम मित्रों को अज्ञानवश मतंग ऋषि के विषय में शंका हो रही हैं.

इसलिए उन्होंने महाभारत अनुशासन पर्व ३/१९ में मतंग ने चंडाल कुल में पैदा होकर

ब्राह्मण होने पर व्यर्थ की आपत्ति उठाई हैं.

स्वामी दयानंद के मंतव्य को न समझ कर व्यर्थ में दुराग्रह करना सज्जनों को शोभा नहीं देता हैं.

एक तरफ तो इस्लाम या ईसाइयत को मानने वाले लोग हिंदुयों की

जातिवाद का पोषक कहकर निंदा करते हैं.

दूसरी तरफ आधुनिक भारत में स्वामी दयानंद ऐसे पहले समाज सुधारक हैं

जिन्होंने जातिवाद रुपी कुप्रथा पर प्रहार कर उसे मूल से नष्ट करने का आह्वाहन किया हैं.

ऐसे में उनके महान कार्य का सहयोग न कर दुराग्रही एवं अज्ञानी लोग उनके

मंतव्यों पर व्यर्थ आक्षेप करने का निष्फल प्रयास करते हैं.

स्वामी दयानंद महाभारत अनुशासन पर्व ३/१९ में मतंग ने चंडाल कुल में

पैदा होकर ब्राह्मण पद पाया का विवरण दिया हैं जो की मुस्लिम भाइयों के अनुसार गलत हैं.

स्थाने मतंगो ब्राह्मण्यमलभद् भरतर्षभ,

चण्डालयोनौ जातो हि कथं ब्राह्मण्यमवाप्तवान् -महा,अनु (3/19) (सत्यार्थ प्रकाश में दिया गया )

एवं

स्थाने मतंगो ब्राह्मण्यं नालभद् भरतर्षभ,

चण्डालयोनौ जातो हि कथं ब्राह्मण्यमवाप्तवान् -महा,अनु (3/19) (गीता प्रेस गोरखपुर में दिया गया)

http://www.sacred-texts.com/hin/m13/m13a003.htm#fr_6

ब्राह्मण्यं नालभद् में न शब्द की मिलावट हैं , न का अर्थ हैं नहीं.

स्वामी दयानंद स्पष्ट रूप से कह रहे हैं की रामायण, महाभारत, पुराण,

मनु स्मृति आदि में वही मानने योग्य हैं जोकि मिलावटी नहीं हैं और वेदों के अनुकूल हैं .

इसलिए मिलावटी महाभारत किसी भी प्रकार से प्रमाण नहीं हैं.

स्थाने मतंगो ब्राह्मण्यमलभद् भरतर्षभ का अर्थ हैं मतंग ने ब्राह्मन पद को प्राप्त किया

और स्थाने मतंगो ब्राह्मण्यं नालभद् भरतर्षभ, का अर्थ हैं मतंग ने ब्राह्मन पद को प्राप्त नहीं किया.

न शब्द की मिलावट कुछ जातिवाद के पोषकों ने करी और उसे हमारे मुस्लिम भाई प्रमाण मान रहे हैं.

यह तो एक प्रकार से एक अन्धे  के द्वारा दूसरे अंधे का अनुसरण करना  हैं.

 

और यह भी सोचो की यदि मतंग ऋषि नहीं बन पाए थे तो महाभारत ग्रन्थ में उनके बारे में चर्चा ही क्यूँ की गयी, यह प्रसंग ही क्यूँ उठा ? इतिहास में तो करोड़ों मतंग हो चुके हैं  !

 

अब देखिये महाभारत अनुशासन पर्व में २७/८ में क्या लिखा है !

http://www.sacred-texts.com/hin/m13/m13a027.htm

मतंग और एक गधा के बीच एक बातचीत. एक बार एक समय पर एक ब्राह्मण का  एक बेटा था जो हालांकि एक अन्य  व्यक्ति द्वारा उत्पन्न था लेकिन , बचपन और जवानी  में  ब्राह्मण के नियमों के अनुसार  उसके संस्कार  किये गये . बच्चे को मतंग के नाम से बुलाया गया था और हर उपलब्धि उसके पास थी .

सबसे पहले तो यह विचार करना चाहिए की क्या गधा बोल सकता है?   ……………………1

पुन: महाभारत ही यहाँ कह रहा है की मतंग के पिता ब्रह्मण थे. और मतंग का ब्राह्मन वर्णानुसार उपनयन अदि हुआ . अब उनके ब्राह्मन होने में क्या संदेह है ?

…..

मतंग गधी से : दोस्त तुम्हें कैसे पता है कि मैं एक चंडाल पैदा हुआ ?  गधी तो अंतर्यामी है !………………2

…….

अध्याय के अंत में लिखा है कि, एक चंडाल  के रूप में पैदा हुआ,  ब्राह्मन वर्ण कि स्थिति को, जो देवताओं , असुर  और मनुष्य के बीच में सबसे पवित्र माना जाता है   कभी नहीं पा सकता !

…..

अध्याय आरम्भ तो इस बात से होता है कि मतंग जी का संस्कार  ब्राह्मन वर्ण के अनुसार हुआ था और अंत में ये कहा गया कि ऐसा संभव ही नहीं है. इससे यही निष्कर्ष निकलता है कि जन्मना जाती वाद पोशाकों ने मिलावट कि है . स्वामी दयानंद का मत भी यही है . ……………………3

…..

इंद्र दिखाई दिया, और कहा, हे मतंग क्यों,……  लेकिन मुझे बताओ कि तेरे  ह्रदय  में  क्या है. [इन्द्र अंतरयामी कैसे?]….4

…….

भारत में  मतंग जी के नाम से कई आश्रम/  मंदिर   हैं [गया श्राद्ध  ] जो इस बात कि गवाही देता है कि  मतंग  ऋषि थे ………..5

http://www.team-bhp.com/forum/travelogues/57984-trails-magadh-2.html  scroll down for matangvapi vedi temple photo

http://www.flickr.com/photos/34040726@N04/3169038105/

http://www.cbseguess.com/education/india_facts/story_of_shabari.php

http://wiki.answers.com/Q/What_is_the_history_of_matang_caste  बौद्ध धर्म  में मतंग  बोद्धिसत्व  (मतंग जातक के नायक) का  नाम है, यह प्रत्येकबुद्धा का  भी नाम है   , और मातंगी  देवी का  बौद्ध पाठ दिव्यवदन  में उल्लेख किया है.

…….

ऊपर लिखे ५ प्रमाणों को देखते हुए ये सिद्ध होता  है कि  मतंग ऋषि थे.

इसलिए पाठकों अंधों और अज्ञानियों से बचो और आर्यों से ज्ञान ग्रहण करो .

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डॉ. विवेक आर्य और प्रोफेसर सुरेन्द्र कुमार जी  के साथ चर्चा के  लिए  आभार

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